
deoband
देवबंद। यह खबर अंधविश्वास काे बढ़ावा नहीं देती लेकिन आस्था की वकालत करती है। इस्लामिक शिक्षा की नगरी देवबंद में त्रिपुर मां बाला सुंदरी के मंदिर में एक एेेसा तालाब है जिनमें नहाने मात्र से राेगियाें के राेग आैर दीन दुखियाें के दुःख नष्ट हाे जाते हैं। आदि अनादि काल से देवबंद में स्थित श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी शक्तिपीठ देश विदेश में रहने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। एेसी मान्यता है कि, मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी की उपासना करने वालों को भोग तथा मोक्ष दोनों प्राप्त होते है।
ऐतिहासिक नगरी देवबंद के छोर पर स्थित श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी शक्तिपीठ लगभग चौतीस बीघा भूमि में फैला हुआ है जिसमें मन्दिर के अतिरिक्त विशाल देवीकुण्ड, मनमोहक पार्क, संस्कृत महाविद्यालय आदि शामिल हैं। इस शक्तिपीठ पर ही भारतीय शक-संवत के अनुसार प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की चतुर्दशी पर मेला लगता है जिसमें देश-विदेश के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और मां बाला सुंदरी अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी यहां पीठ में एक छोटी प्रतिमा में प्राकृत रूप में विराजमान हैॆ। चांदी की पिंडी से आवृत इस प्रतिमा को पुजारी आंखें बंद करके स्नान कराने के बाद चंदन और इत्र से सुशोभित कर पुन: आवरण में छिपा देते हैं। बताया जाता है कि पूर्व में किसी पुजारी ने भूलवश स्नान कराते समय आंखें खोल ली थी तो वह अंधा हो गया था।
शक्तिपीठ पर प्रतिवर्ष चैत्र सुदी चौदस से पूर्व तेज हवाएं आंधी तूफान तथा वर्षा के साथ मां शक्तिपीठ में प्रवेश करती हैं तथा इसी प्रकार वापस लौटती हैं, ऐसा आदिकाल से होता आ रहा है। ऐसा क्यों होता है ? यह रहस्य अनसुलझा है। इसके बारे में मान्यता है कि माता भगवती देवी मंदिर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं। लगभग एक सप्ताह के बाद तेज हवाओं व बूंदाबांदी के साथ ही माता त्रिलोकपुर (हिमाचल प्रदेश) के मुख्य मंदिर में वापिस लौट जाती हैं। मंदिर के पंडित सतेंद्र शर्मा का कहना है कि माता सदैव इसी मंदिर में विराजमान रहती हैं। सिद्धपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर की स्थापना कब और किसने की, इसके पुख्ता प्रमाण तो किसी के पास नहीं है परंतु मारकंडे पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों से पता चलता है कि इस शक्तिपीठ की स्थापना महाभारत काल में हुई थी।
कुंड मे नहाने से खत्म हाे जाती हैं बीमारियां
मंदिर के सामने बनेश्वर सरोवर हैं इस सराेवर काे देवी कुंड भी कहते हैं। एेसी मान्यता है कि जाे भी बीमार व्यक्ति इस देवी कुंड में स्नान कर लेता है उसे राेगाें से मुक्ति मिल जाती है। यही कारण है यहां आने वाले श्रद्धालु इस देवी कुंड में डुबकी लगाते हैं स्नान करते हैं। यह देवी कुंड मंदिर की स्थापना के दौरान ही बनाया गया था। खास बात यह है कि इस देवी कुंड में कभी पानी नहीं सूखता यहां हर माैसम में देवी कुंड में भरपूर पानी रहता है।
एेसा है मां का स्वरूप
मां भवानी राज राजेश्वरी मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी मां महाशक्ति जगदम्बा का रूप हैं। ब्रहमा, विष्णु और महेश तीन पुर (शरीर) जिनमें है, वह त्रिपुर बाला है। तंत्र सार के मुताबिक मां राजेश्वरी त्रिपुर बाला सुंदरी प्रात: कालीन सूर्यमंडल की आभा वाली है। चार भुजा एवं तीन नेत्र हैं। अपने हाथ में पाश, धनुष-बाण और अंकुश लिए हुए हैं। मस्तक पर बालचंद्र सुशोभित है।
Published on:
19 Oct 2018 01:56 pm
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