
सहारनपुर। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अभी जीत का जश्न ठीक से तरह से मनाया भी नहीं था कि उन्हें बड़ा झटका लग गया। इतना नहीं उनकी सारी खुशी मायूसी में बदल गई। जी हां, देवबंद नगर पालिका परिषद के जलकल विभाग में वर्षों पूर्व हुए फर्जी बिल घोटाले में फंसे बसपा चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी को जमानत नहीं मिल सकी। दो दिन पहले जियाउद्दीन अंसारी ने न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। न्यायालय ने इनकी अंतरिम बेल निरस्त करते हुए इन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। अब बुधवार को एक बार फिर से जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी अपनी दलीलें न्यायालय में पेश की, लेकिन न्यायालय की ओर से जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद कोई फैसला नहीं सुनाया गया और एक बार फिर से देवबंद पालिका अध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पूर्व में हुए घोटाले का जिन्न बाहर आते ही बसपा नेता और देवबंद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी की मुश्किलें काफी बढ़ गई है।
यह है मामला
वर्ष 2000 में बसपा नेता जियाउद्दीन अंसारी देवबंद नगर पालिका से अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। अपने कार्यकाल के अंतिम महीनों में एक सभासद विनय कुमार ने इन पर धोखाधड़ी करने और सरकारी धन का दुरुपयोग करने के आरोप लगाया था। इन आरोपों के आधार पर जियाउद्दीन अंसारी के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए थे। शासन ने इस जांच की जिम्मेदारी सहारनपुर एसडीएम को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने पर वर्ष 2004 में जियाउद्दीन अंसारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मुकदमे में जियाउद्दीन अंसारी पर आरोप है कि उन्होंने जलकल विभाग के एक बाबू के साथ मिलकर लोहानी सराय के इमरान पंप स्टोर को गलत तरीके से भुगतान किया और सरकारी पैसे का दुरुपयोग करते हुए पालिका को नुकसान पहुंचाया।
मुसीबत में फंसे बसपा नेता
पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट न्यायालय के समक्ष पेश की लेकिन, इसी बीच आरोपी जियाउद्दीन अंसारी हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। 2014 में हाई कोर्ट का स्टे आर्डर लगातार गैरहाजिरी के चलते निरस्त हुआ और निचली अदालत में एक बार फिर से इस मामले की कार्रवाई शुरू हो गई। एसीजेएम देवबंद ने जियाउद्दीन अंसारी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। अदालत की इस कार्रवाई के बाद जियाउद्दीन अंसारी एक बार फिर हाईकोर्ट चले गए, जहां से उन्हें 45 दिन के अंदर जमानत कराने के लिए न्यायालय के समक्ष पेश होने का आर्डर मिल गया। यह आर्डर मिलने के बावजूद जियाउद्दीन अंसारी अदालत के समक्ष पेश नहीं हुए और उन्होंने एसीजेएम देवबंद की अदालत में चल रहे मुकदमे के संबंध में यह कहते हुए पुलिस क्षेत्र अधिकारी को पत्र लिख दिया कि लोक सेवक होने के नाते उनके मामले की सुनवाई का अधिकार एसीजेएम को नहीं है। इसलिए उन्हें एसीजेएम की अदालत में पेश होने की आवश्यकता नहीं है और एसीजेएम की ओर से लिया गया निर्णय स्वत ही निरस्त हो जाता है।
जेल की हवा खाएंगे बसपा नेता
पालिका अध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी के इस पत्र के आधार पर जिला न्यायालय ने इस मामले को एसीजेएम की कोर्ट से अपने यहां मंगा लिया और 8 मार्च 2018 को देवबंद पालिका चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई के वारंट जारी कर दिए गए। जब इस बात का पता जियाउद्दीन अंसारी को चला तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई और वह एक बार फिर से हाईकोर्ट की ओर दौड़े। हाईकोर्ट से एक बार फिर जियाउद्दीन अंसारी को 10 दिन के भीतर न्यायालय के समक्ष पेश होने का आर्डर मिल गया। इसी ऑर्डर के तहत मंगलवार को जियाउद्दीन अंसारी सहारनपुर सीजेएम कोर्ट में पेश हुए, जहां उनकी जमानत अर्जी को रद्द कर दिया गया। इसके बाद जियाउद्दीन अंसारी के वकील की ओर से अंतरिम जमानत की अर्जी लगाई गई, लेकिन एडीजे प्रथम की अदालत से इसे भी निरस्त कर दिया गया और बुधवार की तारीख नियत कर दी गई। बुधवार को इस मामले में एक बार फिर से सुनवाई हुई, लेकिन अदालत की ओर से कोई निर्णय नहीं दिया गया और फैसला सुरक्षित रख लिया गया।
Published on:
21 Mar 2018 05:23 pm
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