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बाल सरंक्षण आयोग ने दारुल उलूम से पूछे सवाल, दस दिन में देने होंगे जवाब

बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से देवबंद दारुल उलूम सवालों के घेरे में है। बाल सरंक्षण आयोग ने दारुल उलूम से सवाल किए हैं। इसके लिए दारुल उलूम को दस दिन का समय दिया गया है।

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प्रतीकात्मक फोटो

दशकों पुरानी पुस्तक बहीश्ती जेवर को लेकर दारुल उलूम एक बार फिर से सुर्खियों में है। दरअसल राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग ( NCPCR ) ने प्रशासन के माध्यम से दारुल उलूम से फिर नए सवाल किए हैं। तीन माह पहले भी एनसीपीसीआर ने कुछ सवाल दारुल उलूम से पूछे थे। सूत्रों की माने तो प्रशासन ने दारुल उलूम को दस दिन के भीतर नए सवालों के जवाब देने के लिए कहा है। यह बात अलग है कि इस मामले की अधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं है।

जानिए पूरा मामला
दरअसल दिल्ली की एक संस्था मानुषी सदन ने राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग से एक शिकायत की थी।इस शिकायत में संस्था ने दशकों पुरानी किताब बहीश्ती जेवर का जिक्र करते हुए बच्चों के यौन उत्पीड़न की आशंका जताई थी। संस्था ने ये भी आरोप लगाए थे कि बहीश्ती जेवर नाम की पुष्तक को दारुल उलूम में पढ़ाया जा रहा है। इसी मामले की जांच करने के लिए शिक्षा विभाग की एक टीम देवबंद दारुल उलूम भी पहुंची थी।

बहीश्ती जेवर पुस्तक पर जानिए दारुल उलूम का जवाब
बहीश्ती जेवर पुस्तक के दारुल उलूम के पाठ्यक्रम में शामिल होने की बात पर दारुल उलूम की ओर से एक लिखित जवाब जिलाधिकारी को भेजा गया था। इस जवाब में लिखा गया था कि बहीश्ती जेवर पुस्तक महिलाओं और युवतियों के शरई मामलों से संबंधित है। ये किताब पुरुषों के लिए नहीं है और दारुल उलूम के पाठ्यक्रम में भी शामिल नहीं है। उस समय बहीश्ती जेवर पुष्तक के जिन पेजों के लेकर आपत्ति जताई गई थी उस सामग्री को भी दारुल उलूम ने अपनी वेबसाइट से हटा लिया था। अब एक बार फिर से आयोग ने कुछ नए सवाल पूछे हैं।