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फोन कॉल रिकॉर्ड करने को लेकर जारी हुआ चौंकाने वाला फतवा, सोशल मीडिया पर जमकर हो रहा वायरल

आज के दौर में मोबाइल फोन पर बात करते हुए एक-दूसरे की कॉल को रिकार्ड करना आम बात हो गई है।

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फोन कॉल रिकॉर्ड करने को लेकर देवबंद ने जारी किया चौंकाने वाला फतवा, सोशल मीडिया पर जमकर हो रहा वायरल

सहारनपुर/देवबंद। आज के दौर में मोबाइल फोन पर बात करते हुए एक-दूसरे की कॉल को रिकार्ड करना आम बात हो गई है। इस बीच दारुल उलूम देवबंद द्वारा एक फतवा जारी किया गया है। जिसमें इसे गलत बताया गया है। इस फतवे में रिकार्ड की गई कॉल को आम करने को बड़ा गुनाह करार दिया है।

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दरअसल, दारुल उलूम देवबंद द्वारा पूर्व में दिया गया एक फतवा तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फतवे में दारुल उलूम से एक शख्स ने सवाल किया था कि आजकल मोबाइल पर आवाज रिकार्ड की जाने लगी है। जिस शख्स की कॉल रिकार्ड जाती है वह उससे बेखबर होता है। अक्सर ऐसी कॉल को आम कर लोगों की इज्जत भी उछाली जाती है। तो ऐसे में शरीयत की रोशनी में इस तरह की कॉल रिकार्ड करना दुरुस्त है?

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इसके जवाब में दारुल उलूम के मुफ्तियों की खंडपीठ ने दिए फतवे में कहा कि आपस में जो बातचीत होती है वह अमानत है। इसलिए बिना इजाजत आने और जाने वाली कॉल को रिकार्ड करना दुरुस्त नहीं है और कॉल को रिकार्ड करके इसको आम करना पूरी तरह से गलत है।

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खासतौर पर जबकि बात ऐसी हो जो गुप्त रखने वाली हो और सामने वाले को भरोसेमंद समझ कर कोई अपने दिल की बात कर रहा हो। फतवे में स्पष्ट किया गया कि जहां निजी बातचीत को आम करने से आपसी ताल्लुकात खत्म होते हैं, वहीं यह अमानत में बड़ी ख्यानत है। इसलिए इस ख्यानत करने का गुनाह होगा। ये फतवा सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है।

देवबन्द के मुफ्ती अशद कासमी कासमी ने कहा कि जो फतवा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है कि कॉल रिकॉर्डिंग जो की जाती है और दूसरों को सुनाया जाता है। उसके बारे में दारुल उलूम देवबंद का फतवा यह है कि कॉल रिकॉर्डिंग दूसरो को सुनाना जायज नहीं है। वो गुनाह बताया गया है। उसकी वजह फतवे में लीखी गई है कि कोई भी आम इंसान आपस में एक दूसरे से बात करता है तो वो बात एक दूसरे की अमानत होती है और उसकी रिकॉर्डिंग करने के बाद में उसको जो है सोशल मीडिया या दूसरों तक उसको वायरल किया जाता है। तो यह अमानत के अंदर ख्यानत है। दारुल उलूम ने उसको गुनाह बताया है।

उन्होंने कहा कि दारुल उलूम का जो फतवा है वह बिल्कुल सही है। हम उस फतवे की ताहीद करते हैं और हम ही नहीं, पूरे हिंदुस्तान के मुसलमान जो हैं वह दारुल उलूम के फतवे पर आंख बंद करके पूरा इत्मीनान करते हैं और भरोसा करते हैं व उसका पालन करते हैं।