
मंदिर में घुस रही मुस्लिम महिला का इस्लाम से निष्कासन, देवबंद उलेमा ने किया समर्थन
देवबंद। सबरिमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर मचे बवाल के बाद आखिरकार मंदिर के कपाट एक बार फिर बंद हो गए। लेकिन इन 6 दिनों में मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विरोध में बीजेपी-कांग्रेस के कार्यकर्ताओं समेत कई हिंदू संगठन डटे रहे। इस बीच केरल के इस मंदिर में एक मुस्लिम महिला ने प्रवेश करने की कोशिश की जिसके बाद केरल मुस्लिम जमात काउंसिल द्वारा मुस्लिम समुदाय से निष्कासित कर दिया। वहीं अब देवबंदी उलेमा ने निष्कासित किए जाने का समर्थन किया है।
दरअसल देश में बहुत चर्चित सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद किसी भी महिला को अंदर घुसने नहीं दिया गया। लेकिन मंदिर में प्रवेश का प्रयास करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा को मुस्लिम समुदाय से निष्कासित कर दिया गया। अनुमति मिलने के बाद मंदिर में प्रवेश का प्रयास करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा को मुस्लिम समुदाय से निष्कासित करने वाले केरल मुस्लिम समाज काउंसिल के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए देवबंद के ऑनलाइन फतवा विभाग के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि, वहां के प्रशासन ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा रखी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके खिलाफ फैसला दिया और महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को इजाजत दे दी। लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि रेहाना फातिमा वहां क्यों और क्या करने के लिए गई थीं?। इस्लाम में किसी भी मुस्लिम महिला या पुरुष का मंदिरों में जाकर पूजा करने की सख्त मनाही है। उन्होंने साफ कहा कि मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत करते हैं और उसी के सामने सिर झुकाते हैं। रेहाना व उसके परिवार के निष्कासन का सही किया गया है।
Published on:
23 Oct 2018 01:58 pm
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