
हाेलिका
सहारनपुर। होली पर्व सनातन हिन्दू धर्म का मुख्य त्यौहार है। आचार्य पंडित राेहित वशिष्ठ के अनुसार, शास्त्रों में होली के त्याैहार को मनाने की तीन मुख्य कथाएं प्रचलित हैं। आज हम उन तीनों कथाओं के बारे में जानेंगे।
पहली कथा भगवान शिव से संबंधित है
हाेली काे लेकर पहली कथा भगवान शिव से सबंधित है। इस कथा के अनुसार एक बार कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या काे भंग करने की काेशिश की थी। जब कामदेव ने ऐसा करना चाहा ताे भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इस तरह पहली कथा के अऩुसार तभी से होलिका दहन हाेने लगा। ऐसी मान्यता है कि हाेलिका दहन में बुराईयों काे भस्म कर दिया जाता है।
दूसरी कथा भक्त राज प्रहलाद से संबंधित है। पंडित राेहित वशिष्ठ बताते हैं कि हिरण्यकश्यप नामक के राक्षस का पुत्र भक्तराज प्रहलाद भगवान का अनन्य भक्त था ।हिरण्यकश्यप भगवान से ईर्ष्या करता था। इसलिए उसने भक्तराज प्रहलाद यानी अपने बेटे को मारने का निश्चय किया। हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था। उसने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था किसी भी प्रकार की अग्नि उसे जला नहीं सकेगी।
इसलिए वह प्रतिदिन अग्नि स्नान किया करती थी। अपने इस वरदान के अहंकार में उसने भक्तराज प्रहलाद को मारने का षड्यंत्र रचा । एक बहुत बड़ी चिता तैयार की गयी, होलिका भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर चिता पर चढ़कर बैठ गई । जब चिता में आग लगाई गई तो भक्त प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ और वह होलिका जल कर राख हो गई। तभी से यह मान्यता है कि हाेलिका अहंकार काे भी नष्ट कर देती है।
तीसरी कथा भविष्य पुराण में आती है। भगवान राम के पूर्वज रघु थे। इन्हीं के नाम से भगवान राम के वंश का नाम रघुवंश पड़ा। महाराजा रघु के शासनकाल में एक माली नाम के राक्षस की पुत्री थी जिसका नाम ढोंढा था। वह बालको को खा जाती थी। नगरवासी इकट्ठे होकर राजा के पास आए और उस ढोंढा राक्षसी के द्वारा किए गए अत्याचारों की कथा सुनाई। महाराजा रघु चिंतित हो उठे और उन्होंने अपने कुल गुरु वशिष्ठ जी से राक्षसी को मारने का उपाय पूछा।
वशिष्ठ जी ने कहा कि नगर के बीचो बीच चौराहे पर लकड़ी और उपलो का एक बहुत बड़ा ढेर बनाया जाए। लकड़ी और उपलों के ढेर को होलिका का नाम दिया जाए। नगर के सभी बालक हाथों में लकड़ी की तलवार लेकर युद्ध में जाने का नाटक करते हुए उस स्थान पर आयें और सब बालक जोर जोर से हंसी मजाक करें और उस होलिका में आग लगा दे । रक्षा मंत्र से आहुति दें। ऐसा करने से वह राक्षसी मर जाएगी और ऐसा ही हुआ ।
जानिए हाेलिका पूजन की सही विधि
एसी मान्यता है कि, होलिका पूजन महिलाओं और बालकों को विशेष रूप से करना चाहिए। रोली व गुलाल पुष्प धूप दीपक मिठाई फल और दक्षिणा के साथ होलिका की पूजा करनी चाहिए। होलिका पूजन का मंत्र है " श्री होलिकायै नमः" पूजन के पश्चात होलिका की एक परिक्रमा भी एक करनी चाहिए ।
होलिका दहन की विधि एवं मुहूर्त
होलिका दहन सावधानीपूर्वक मंत्रों के जानने वाले ब्राह्मण से ही कराना चाहिए। पहले योनि मंत्र के द्वारा होलिका की पूजा करनी चाहिए। रक्षा मंत्र के द्वारा दाह करना चाहिए। धर्म ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन करने वाले व्यक्ति के पिता को कष्ट होता है । अतः होलिका दहन उसी व्यक्ति को करना चाहिए जिसके पिता जीवित न हो।
होलिका दहन के लिए ये हैं शुभ समय
ज्योतिष ग्रंथों में कहा गया है कि होलिका दहन भद्रा रहित होना चाहिए।
सोमवार 9/3/2020 को भद्रा दोपहर 1:12 तक है ।
होलिका दहन का शुभ समय सायं 6:23से 7:55बजे तक है ।
Updated on:
09 Mar 2020 11:14 am
Published on:
09 Mar 2020 10:58 am

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