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घायल के पेट से आंत बाहर निकल पड़ी फिर भी नहीं आए डॉक्टर जानिए डीएम ने कैसे बचाई जान
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घायल के पेट से आंत बाहर निकल पड़ी फिर भी नहीं आए डॉक्टर जानिए डीएम ने कैसे बचाई जान

सहारनपुर के जिला अस्पताल में घटी इस घटना ने ना सिर्फ जिला अस्पताल में लापरवाही की पाेल खाेली है बल्कि मानवीय संवेदनाआें काे भी तार-तार कर दिया।
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सहारनपुर

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shivmani tyagi

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Updated: 28 Apr 2018, 7:02 PM IST

चलती ट्रेन में संदिग्ध हालाताें में पेट में कांच घुस जाने से गंभीर रूप से घायल हुए युवक काे जिला अस्पताल में भी उपचार नहीं मिल सका। इसके पेट से आंत बाहर निकली पड़ी थी आैर लगातार खून बह रहा था। युवक की यह हालत देखकर एमरजेंसी स्टाफ ने कॉल पर नियुक्त सर्जन काे कई बार कॉल की लेकिन वह नहीं पहुंचे। डेढ़ घंटे बाद भी जब डॉक्टर नहीं पहुंचे ताे किसी ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की शिकायत की इसके बाद इस आए डॉक्टर ने इस युवक काे हायर सेंटर के लिए रेफर किया जिससे इसकी जान बच गई। मेरठ मेडिकल के डॉक्टराें ने इस घायल का सफल अॉपरेशन कर दिया।

बिहार के जिला दुमका का रहने वाला 25 वर्षीय अलीस मरांडी अपने दाेस्ताें दिपील सैरेन, धीरज कुमार आैर मंटू के साथ अंबाला जा रहा था। अभी ट्रेन रुड़की ही पहुंची थी कि अचानक किसी बात काे लेकर हुए विवाद के बाद अलीस बुरी तरह से घायल हाे गया। इसके पेट में कांच घुसा हुआ था आैर आंतें बाहर निकल आई थी। ट्रेन के सहारनपुर पहुंचने पर इसे आनन-फानन में जिला अस्पताल लाया गया लेकिन यहां इसे समय पर उपचार नहीं मिल सका। ईएमआे ने प्राथमिक ताैर पर इंफेक्शन आैर दर्द काे राेकने के इंजेक्शन देते हुए सर्जन काे एमरजेंसी में आने के लिए कॉ़ल कराई लेकिन सर्जन नहीं पहुंचे। डॉ़क्टर के नहीं पहुंचने परह इसे समय से उपचार नहीं मिल सका आैर करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल के बेड पर खून से लथपथ पड़ा तड़पता रहा। बाद में जब डीएम सहारनपुर पीके पांडेय काे जब इस बात का पता चला ताे उन्हाेंने सीएमएस से इस लापरवाही का कारण पूछा। इसके बाद दाैड़े डॉक्टराें ने इसे आनन-फानन में हायर सेंटर रेफर किया। शुक्रवार शाम तक इसकी हालत गंभीर बनी हुई थी आैर सहारनपुर मेरठ मेडिकल में इसका उपचार चल रहा था।

योगीराज में स्वास्थ्य सेवाओं का कैसा हाल है इस घटना ने यह साबित कर दिया है। जिला अस्पताल की एमरजेंसी में तैनात ईएमआे ने ताे इस घायल काे प्राथमिक उपचार दे दिया लेकिन अगले दाे घंटे तक सर्जन नहीं पहुंचे आैर घायल युवक बेड पर पड़ा तड़पता रहा। घायल काे सुबह 6:30 बजे भर्ती कराया गया था आैर जब डेढ़ घंटे बाद भी काेई डॉक्टर उपचार के नहीं लिए पहुंचे ताे पत्रिका रिपाेर्टर ने इस लापरवाही की बाबत जिलाधिकारी काे अवगत कराया। जिलाधिकारी ने एसआईसी से मामले की जानकारी मांगी ताे जिला अस्पताल के डॉक्टराें की नींद खुली। एसआईसी तुरंत माैके पर पहुंचे। एसआईसी यानि प्रमुख अधीक्षक ने जब इस युवक की हालत देखी ताे वह खुद वह भी सन्न रह गए। यहां घायल को पट्टी तक नहीं की गई थी और इसके पेट से आंत बाहर निकली हुई थी। बेड पर खून बह रहा था और मांस के लोथड़े पड़े हुए थे। इस घोर लापरवाही पर एसआईसी ने तुरंत सर्जन को फोन करके कहा कि माैके पर पहुंचिए। इतना कुछ हाेने के बाद पहुंचे सर्जन ने घायल का इलाज करने में असमर्थता जताते हुए कहा कि सहारनपुर अस्पताल में इतने गंभीर रोगी का इलाज ही नहीं हो सकता क्याेकि जिला अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं आमनवीय ढंग से डॉक्टर से यह तक कह दिया कि इस रोगी को भर्ती क्यों किया गया ? इसको बाहर से बाहर ही रेफर कर देना चाहिए था। सर्जन ने जब ट्रॉमा सेंटर पहुंच कर यह बात कही तो एसआईसी उन्हें एक कोने में ले गए और दोनों ने यहां काफी देर तक बात की। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस दौरान एसआईसी और सर्जन के बीच जिंदगी और मौत के बीच लटके इस घायल युवक की हालत को लेकर नहीं बल्कि इस बात को लेकर चर्चा हो रही थी कि आखिर इसको किसने भर्ती किया। इस दौरान एसआईसी बोले कि अब भर्ती कर लिया है तो उसका कुछ इलाज कर दो लेकिन सर्जन ने साफ कह दिया कि इसका कोई इलाज नहीं हो सकता है। अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा नहीं है ना ही बाकी जांच हाे सकती हैँ। इसके बाद आनन-फानन में इस युवक को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। खुद सर्जन ने एंबुलेंस बुक कराई और इसको मेरठ के लिए रेफर कर दिया। सहारनपुर जिला अस्पताल में यह पहली घटना नहीं है हम आपको बता दें कि यहां इमरजेंसी में साफ लिखा है कि गंभीर रोगियों को भर्ती ना किया जाए। स्मार्ट सिटी सहारनपुर में कहने के लिए मेडिकल कॉलेज भी है लेकिन यहां हालात यह है कि मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल घायलों को रेफर कर दिया जाता है आैर जिला अस्पताल में भी केवल प्राथमिक उपचार ही घायलों को मिल पाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आखिर सहारनपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग को लेकर जो बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं वह सब खाेखले हैं। सवाल यह भी है कि क्या लाखों करोड़ों रुपया सिर्फ प्राथमिक उपचार के लिए खर्च किया जा रहा है। सवाल यह भी है कि आखिर बार बार कॉल करने के बाद भी सर्जन घयल को देखने के लिए क्यों नहीं पहुंचे। सवाल यह भी है कि सहारनपुर जिला अस्पताल में आखिर डॉक्टर कॉल पर क्यों नहीं आते ? जिला अस्पताल के इमरजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात 8:00 बजे से शनिवार सुबह 6:30 बजे तक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पांच ऐसे केस पहुंचे थे जिनमें घायलों की हालत बेहद गंभीर थी। इन सभी मामलों में जिला अस्पताल की एमरजेंसी में तैनात ईएमआे की ओर से ड्यूटी पर तैनात सर्जन को कॉल की गई लेकिन एक भी मामले में सर्जन नहीं पहुंचे और बाद में इन सभी को रेफर कर दिया गया। इस लापरवाही पर जब जिला अस्पताल के एसआईसी यानि प्रमुख अधीक्षक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले में वह काेई भी बाईट नहीं देंगे। इस मामले में बाईट जिलाधिकारी देंगे। बगैर कैमरा पूछने पर उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला बेहद लापरवाही का है युवक की हालत काफी गंभीर है और उसकी जान को खतरा बना हुआ है इस पूरे मामले में एसआईसी ने ईएमआे की गलती मानी है। प्रमुख अधीक्षक डा. सत्य सिंह का कहना है कि पूरे मामले में ईएमआे की गलती है। जब सर्जन कॉल पर नहीं आए ताे ईएमआे काे सीएमएस या सीएमआे काे बताना चाहिए था।

 

जानिए काैन डॉक्टर हाेते हैं कॉल पर

दरअसल जिला अस्पताल की एरजेंसी में एक ईएमआे की तैनाती हाेती है। ईएमआे जूनियर डॉक्टर हाेते हैं जाे सामान्यतः प्राथमिक उपचार देते हैं। एेसे में अगर काेई गंभीर राेगी पहुंचता है ताे संबंधित एक्सपर्ट काे कॉल करके बुलाया जाता है। मसलन अगर काेई एक्सीडेंट का केस आता है ताे सर्जन काे कॉल की जाती है। इसी तरह से हड्डी राेग विशेषज्ञ, बाल राेग विशेषज्ञ आदि कॉल पर रहते हैं। यदि काेई गंभीर मामला इनके संबंधी आता है ताे इन्हे कॉल करके तुरंत बुलाया जाता है। इस मामले में भी एेसा ही हुआ। ईएमआे ने प्राथमिक उपचार देने के बाद सर्जन काे कॉल कराई लेकिन सर्जन नहीं आए। अस्पताल में पता करने पर यह भी जानकारी मिली है कि शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे से शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे तक करीब पांच बार सर्जन काे कॉल की गई लेकिन वह एक भी केस काे अंटेंड नहीं करने के लिए नहीं पहुंचे। मेयर संजीव वालिया ने डॉक्टर की इस लापरवाही पर अफसाेस जाहिर करते हुए इस संदर्भ में जिम्मेदार अफसराें से जांच कराने आैर व्यवस्था में सुधार करवाए जाने की बात कही है। नगर विधायक संजय गर्ग का कहना है कि अस्पताल में इस तरह की लापरवाही बेहद साेचनीय है। उन्हाेंने कहा कि इस मामले काे शासन तक उठाएंगे आैर सरकार स्वास्थ्य सेवाआें के जाे दावे कर रही है उसे आईना दिखाने का काम करेंगे। सीएमएस का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है आैर जिलाधिकारी ने भी इस पूरे मामले में रिपाेर्ट एसआईसी से मांग ली है।