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देवबंद: देश के विख्यात इस्लामिक संस्थान दारुल उलूम के गेट पर भी लहरा तिरंगा

देवबंद दारूल उलूम के मुख्य द्वार पर उन्हाेंने पहले कभी गणतंत्र या स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे काे लहराते हुए नहीं देखा।

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Darul Uloom

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सहारनपुर. मदरसाें के साथ-साथ इस बार स्वतंत्रता दिवस पर दारुल उलूम देवबंद के मुख्य द्वार पर भी तिरंगा लहरा उठा। जानकाराें का दावा है कि विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान रखने वाले देवबंद दारुल उलूम के मुख्य द्वार पर उन्हाेंने पहले कभी गणतंत्र या स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे काे लहराते हुए नहीं देखा। यह पहली बार है जब दारुल उलूम के मुख्य द्वार पर उन्हाेंने तिरंगे काे लहराते हुए देखा है। कुछ लाेगाें का यह भी कहना है कि करीब एक दशक पहले तक दारुल उलूम परिसर में स्थित छात्रावास में ध्वजाराेहण हाेता रहा है लेकिन मुख्य द्वार पर तिरंगा पहली बार ही लगाया गया है।

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देवबंद दारूल उलूम के मुख्य द्वार पर तिरंगा लहराया ताे इसकी शान देख तलबाआें के भी चेहरे खिल उठे। मुख्य द्वार पर लहरा रहे तिरंगे की शान देखकर मानाें तलबा फूले नहीं समा रहे थे। बार-बार इनकी निगाह तिरंगे की आेर जा रही थी। कारण भी था दरअसल इनके लिए यह पहला अनुभव था जब दारुल उलूम के गेट पर वह तिरंगे काे लहराते हुए देख रहे थे। इस दाैरान कुछ तलबाआें काे यह कहते हए भी देखा गया कि देखिए दारुल उलूम के मुख्य गेट पर तिरंगा कितना अच्छा लग रहा है।

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दरअसल इस बार याेगी सरकार के आदेशाें के बाद सभी मदरसाें में तिरंगा फहराया गया आैर राष्ट्रगान भी गाया गया। यह अलग बात है कि पंद्रह अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देवबंद के पूर्व विधायक आैर सपा नेता माविया अली ने याेगी के इस आदेश का विराेध करते हुए एक नई बहस काे जन्म दे दिया था। माविया अली ने कहा था कि मदरसाें में तिरंगा फहराने आैर वीडियाेग्राफी कराने के याेगी के आदेशाें काे वह नहीं मानेंगे। इस बयान के बाद यह माना जा रहा था कि सहारनपुर के कुछ मदरसाें में तिरंगा फैराने में संकाेच किया जा सकता है लेकिन एेसा नहीं हुआ। पूर्व विधायक माविया की बात किसी ने मदरसे ने नहीं मानी आैर जिलेभर के मदरसाें में तिरंगा फहराया गया। इससे यह बात साफ हाे गई है कि जाे बयान माविया अली ने दिया था वह उनका व्यक्तिगत बयान था।