
शिमला देवी
सहारनपुर। सहारनपुर के गंगोह कस्बे की रहने वाली शिमला देवी मरने के बाद भी लोगों के बीच जिंदा रहेंगी। उन्होंने मृत्यु उपरांत अपने नेत्र करनाल के माधव नेत्र बैंक को दिए हैं और अपना पूरा शरीर मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया है।
इस तरह मरने के बाद भी वह जिंदा रहेंगी। शिमला देवी की आंखें दो लोगों की जिंदगी में प्रकाश भर देंगी। उनकी आंखों को बैंक से उन लोगों को लगाया जाएगा जिन्होंने आज तक इस खूबसूरत दुनिया को नहीं देखा है। उनका देह भी फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज में रहेगा और डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राएं उनके शरीर पर अध्ययन कर सकेंगे। शिमला देवी गंगोह के मोहल्ला मोहम्मद गौरी की रहने वाली हैं। उनके पति शिव कुमार चिकित्सक हैं। शिमला देवी की उम्र 60 वर्ष थी और वर्ष 2018 में ही उन्होंने अपना देह दान और नेत्रदान करने का संकल्प ले लिया था। इस दौरान उन्होंने अपना एफिडेविट देते हुए देह दान का फॉर्म भरा था।
सोमवार को शिमला देवी का निधन हो गया। निधन उपरांत उनके परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार मेडिकल कॉलेज और नेत्र बैंक को सूचना दी जिसके बाद उनकी देह को मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद भिजवा दिया गया। उनके पति डॉक्टर शिवकुमार बालियान समेत उनके पुत्र दुष्यंत गौरव और बेटी रश्मि व छवि ने कहा कि उनकी मां नजीर बन गई हैं। समाज में मृत्यु उपरांत भी जो उन्होंने संदेश दिया है वह पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। उन्होंने अपने नेत्र दान करके दो लोगों की जिंदगी में उजाला कर दिया है साथ ही उनके शरीर से भी मानव जाति के लिए और बेहतर अध्ययन चिकित्सक कर सकेंगे। डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं को मानव शरीर की संरचना को समझने के लिए और बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
Published on:
03 May 2022 11:56 pm
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