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पत्रिका अभियान- खतरे में नौनिहालों की जान ! सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़, अभिभावकों और स्कूल प्रशासन कब लेंगे सुध

तीन पहिया वाहनों को स्कूल वाहनों के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, यह गैरकानूनी है

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saharanpur

शिवमणी त्यागी

सहारनपुर। अगर आपके बच्चे भी स्कूल जाते हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है, क्योंकि इस खबर को पढ़ने के बाद और वीडियो देखने के बाद, आपको मन में कई सवाल उठेंगे कि आखिर आप अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति कितने संवेदनशील हैं? कितने जागरूक हैं ? कितने जिम्मेदार हैं ? यह सवाल सिर्फ अभिभावकों से ही नहीं है, बल्कि यह सवाल स्कूल प्रबंधन से और परिवहन विभाग से भी है कि आखिर सब कुछ आंखों के सामने होते हुए भी वो देख कर भी अनजान क्यों बने हुए हैं ? क्या है पूरा मामला पढिए इस ग्राउंड रिपोर्ट में....

देखें वीडियो- इन नौनिहालों की दुर्दशा के लिए कौन है जिम्मेदार

दरअसल सहारनपुर में घर से स्कूल तक का सफर तय करना नौनिहालों के लिए जान का खतरा मोल लेने से कम नहीं है। ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सहारनपुर में ई-रिक्शा और तीन पहिया टेंपो में बच्चों की ढुलाई की जाती है। यहां ढुलाई शब्द इसलिए इस्तेमाल किया गया है, क्योंकि ई-रिक्शा जिसमें घातक तेजाब से भरी बैटरियां सीट के नीचे रखी हुई होती हैं और टेंपो जो तीन पहियों के सहारे सड़क पर दौड़ता है इनका इस्तेमाल स्कूली वाहन के लिए करना खतरे से खाली नहीं। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह दोनों ही वाहन सुरक्षित नहीं है।

वैसे तो परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक किसी भी ई रिक्शा या तीन पहिया वाले वाहन में स्कूली बच्चों को नहीं ले जाया जा सकता। अगर कोई ऐसा करता है तो यह गैरकानूनी है, बावजूद इसके सहारनपुर में इस लापरवाही पर ना तो परिजनों का ध्यान है और ना ही स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा को लेकर इतना गंभीर हैं। इतना ही नहीं सड़कों पर रोज इस तरह से बच्चों को ई-रिक्शा और टेंपो में ठूस कर ले जाते हुए देखने के बावजूद प्रशासन की ओर कोई कार्यवाही होती नहीं दिखती। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सहारनपुर में प्रशासन, स्कूल प्रबंधन और अभिभावक किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं ? क्योंकि हादसा बता कर नहीं होते।

बच्चों के खतरों से भरे इस सफर की पत्रिका टीम ने ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। जिसके तहत हम शहर के एक जाने- माने स्कूल के गेट पर पहुंचे। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यहां पर बड़ी संख्या में टेंपो और ई-रिक्शा के साथ ही कई अन्य जुगाड़ वाहन खड़े थे जबकि एक भी स्कूल वैन नहीं थी। यानि इन सभी बच्चों को इन्हीं तीन पहिया वाहनों ई रिक्शा और जुगाड़ वाहनों में ले जाया जा रहा था। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि इन स्कूली वाहनों में कोई भी परिचालक या टीचर मौजूद नहीं रहता। केवल एक चालक पर ही सभी बच्चों की जिम्मेदारी रहती है।

आपको बता दें कि पिछले दिनों सहारनपुर जिलाधिकारी पीके पांडे की ओर से यह आदेश जारी किया गया था कि सभी स्कूली वाहनों में एक अटेंडेंट जरूर रहेगा और अगर ऐसा नहीं होता है तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस नियम को लेकर पत्रिका टीम ने शहर के बीचों बीच स्थित रेनबो स्कूल से बच्चों को लेकर निकल रहे कई टेंपो चालकों से बात की इनमें एक भी अटेंडेंट नहीं था और बच्चों की संख्या 15 से 20 तक थी। बच्चों को ठूंस ठूंस कर इन टेंपो में भरा जा रहा था और टेंपो चालक बच्चों को अंदर घुसकर बाहर से कुंडा लगा देता है। इस बारे में पूछे जाने पर उसका कहना था कि बच्चे सुरक्षित हैं उसने बाहर से कुंडा लगा दिया है।

क्या कहते हैं नियम

इस मामले पर जब सहारनपुर टीएसआई तेज प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 3 पहिया वाहनों को स्कूल वाहनों के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, यह गैरकानूनी है ऐसे में सवाल यह है कि जब प्रशासन को यह मालूम है कि तीन पहिया वाहनों को स्कूली वाहन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता तो फिर ऐसा होने क्यों दिया जा रहा है और कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।

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