लावारिस हाे गया यूपी-हरियाणा काे जोड़ने वाला महत्वपूर्ण हाइवे ! ब्रेकर बना वजह

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ( National Highway Authority ) और लोकनिर्माण विभाग दोनों ही एक दूसरे का बता रहे हाइवे। पीएमओ से लिखा गया पत्र तो दोनों ऐजेंसियों ने हाइवे एक दूसरे का बताकर झाड़ लिया अपना-अपना पल्ला

By: shivmani tyagi

Updated: 16 Jul 2021, 06:56 PM IST

शिवमणि त्यागी
पत्रिका न्यूज नेटवर्क, सहारनपुर ( Saharanpur ) उत्तर प्रदेश काे हरियाणा से जाेड़ने वाला महत्वपूर्ण सहारनपुर-सरसावा हाइवे लावारिस हाे गया है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि खुद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (national highway authority) और लोक निर्माण विभाग ( Public Works Department ) इस बात की वकालत कर रहा है। दरअसल पीएमओ ऑफिस से इंक्वायरी आई तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस रोड को लाेक निर्माण विभाग का बता दिया और जब लोक निर्माण विभाग से जवाब मांगा गया ताे उन्हाेंने इस रोड काे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। दोनों ही विभाग देवरानी-जेठानी की तरह इस हाइवे काे एक दूसरे के पल्ले में डाल रहे हैं।

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आपकाे जानकर हैरानी हाेगी कि इसके पीछे की वजह एक ब्रेकर बना है। एक ब्रेकर काे लेकर दोनों ही एजेंसियां अब इस हाइवे से अपना पल्ला झाड़ रही हैं। दरअसल यूपी काे हरियाणा से जाेड़ने वाले सहारनपुर-सरसावा हाइवे पर सौराना में एक ब्रेकर ( the breaker ) है जाे अक्सर यहां दुर्घटनाओं का कारण बनता है। सौराना के ही रहने वाले एक रचनाकार ने पीएमओ काे पत्र लिखकर इस ब्रेकर काे जनहित में हटवाए जाने की मांग की थी। पीएमओ से इस बारे में यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय काे पत्र लिखा गया। मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश लोक निर्माण विभाग भेजे गए। लाेक निर्माण विभाग ने इस हाइवे काे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का बताते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रुड़की काे पत्र लिख दिया और कहा कि यह हाइवे आपके आधीन है। आपकाे यह जानकर हैरानी हाेगी कि इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने फिर से लाेक निर्माण विभाग और सहारनपुर जिलाधिकारी काे पत्र लिखकर कह दिया कि यह राजमार्ग लोक निर्माण विभाग के अधीन है। इसलिए हमारी काेई जिम्मेदारी नहीं बनती।

पीएमओ के आदेशों के बाद भी समस्या जस की तस
पीएमओ से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से लेकर जिलाधिकारी तक पिछले कई महीनाें से इस मामले काे लेकर पत्राचार चल रहा है लेकिन इस बात का पता नहीं चल पा रहा कि यह राजमार्ग किसके अधीन है। इससे भी अधिक हैरान कर देने वाली बात यह है कि पीएमओ पत्र लिखने के बाद भी दोनों विभाग पत्राचार करके हाइवे काे एक दूसरे के पल्ले ताे डाल रहे हैं लेकिन समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं है। समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

ये है पूरा मामला
दरअसल 15 अप्रैल काे सहारनपुर-सरसावा हाइवे पर एक दुर्घटना में दो महिलाओं समेत तीन की मौत हो गई थी। सौराना में मतदान करको लाैट रही दाे महिलाओं समेत एक बाइक सवार को कार ने कुचल दिया था। स्पीड ब्रेकर उछली एक होंडा सिटी कार ने हाइवे किनारे जा रही दाे महिलाओं और एक बाइक बाइक सवार काे अपनी चपेट में ले लिया था। कार में सवार बच्चों समेत अन्य लोगों काे भी चाेट आई थी लेकिन एयर बैग खुल जाने की वजह से उनकी जान बच गई थी। इस तरह यहां अक्सर दुर्घटनाएं हाेती रहती है। इसका कारण यह भी है कि हाइवे पर बनाए गए इन ब्रेकरों काे लेकर ना ताे काेई संकेत बाेर्ड लगाया गया है और ना ही यहां काेई सफेदी की गई है। इसलिए यहां अक्सर दुर्घटनाएं हाेती रहती हैं। इस दुर्घटना के बाद सौराना के ही रहने वाले लेखक और रचनाकार राजीव उपाध्याय ने पीएमओ काे पत्र लिखकर मानकों के विरुद्ध बनाए गए ब्रेकरों काे हटवाए जाने की मांग की थी। पीएमओ से इसके लिए सीएम कार्यालय लिखा गया और इसके बाद से यह निर्देश राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के बीच पंगु बग गए हैं और समस्या जस की तस बनी हुई है।

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