
शब्बीरपुर गांव
सहारनपुर। ''शब्बीरपुर'' यूपी का एक एेसा गांव जिसने उत्तर-प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में राजनीतिक हलचल मचा दी थी। यह वहीं गांव है जिसमें दलिताें के 52 घर जला दिए गए थे आैर पूरे सहारनपुर में जातीय हिंसा की चिंगारी फैल गई थी। इसी गांव में राहुल गांधी काे जाने नहीं दिया गया था आैर बसपा सुप्रीमाे मायावती ने इसी गांव में पंचायत की थी।
आज हम इस गांव का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्याेकि यह गांव अब आदर्श गांव है। जातीय हिंसा की घटना के बाद सहारनपुर सांसद राघव लखन पाल शर्मा ने इस गांव काे गाेद ले लिया था। शब्बीर काे गाेद लिए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। हम इस गांव में विकास कार्याें की जमीनी हकीकत जानने के लिए पहुंचे। हमने ग्रामीणाें से सीधे सवाल किया कि सांसद के इस गांव काे गाेद लेने के बाद क्या विकास कार्य हुए ? हैरान कर देने वाली बात यह थी कि इस गांव में इसी एक सवाल पर अलग-अलग जाति आैर संप्रदाय के लाेगाें की अलग-अलग राय दिखी। यानि साफ है कि गांव आज भी मानसिक रूप से जातीय हिंसा की घटना काे भूला नहीं पा रहा है।
गांव में स्वच्छ पीने का पानी मयस्सर नहीं
गांव में प्रवेश करते ही हमने देखा कि एक बच्चा अपनी साइकिल पर पानी का डब्बा लिए हुए सरकारी नल की आेर जा रहा था। हमने इस बच्चे से पूछा ताे इसने बताया कि घर पर नल ताे है लेकिन उसका पानी-पीने लायक नहीं है। इसी तरह से वह राेजाना पानी लेने के लिए आता है। स्कूल से आते ही सबसे पहले उसे यही काम करना पड़ता है आैर उसके बाद वह खाना खाता है। यह समस्या अकेले एक घर की नहीं थी गांव में सभी वर्ग, जाति आैर आयु के लाेगाें ने पीने का स्वच्छ पानी मयस्सर ना हाेने की बता कही। हालांकि सांसद के इस गांव काे गाेद लेने के बाद यहां कुछ सरकारी नल जरूर लगे लेकिन ग्रामीणाें ने कहा कि जाे नल लगे हैं वह गांव की आबादी के अनुपात में कुछ भी नहीं हैं।
ये बताई मुख्य समस्याएं
ग्रामीणाें ने कहा गांव में पीने का स्वच्छ पानी मयस्सर नहीं
ग्रामीण बाेले गांव में चिकित्सा सुविधा नहीं है जाे हाेनी चाहिए
ग्रामीणाें ने बताया कि गांव में पीने का स्वच्छ पानी नहीं है
ग्रामीणाें ने यह भी कहा कि गांव में साफ सफाई की व्यवस्था नहीं
ये बाेले ग्रामीण
गांव के एक पक्ष के लाेगाें ने कहा कि कुछ विकास हुआ है। गांव में प्रवेश करने वाली सड़क बनी है कुछ सरकारी नल लगे हैं आैर कुछ स्ट्रीट लाइट भी लगी हैं लेकिन काेई बड़ा काम अभी तक गांव में नहीं हुआ।
गांव के ही एक पक्ष के लाेगाें ने साफ कहा कि गांव में काेई विकास कार्य नहीं हुआ। सरकारी नल लगाने में भी पक्षपात किया गया लाेग परेशान हैं आैर उन्हे पीने का पानी भी मयस्सर नहीं हाे रहा है।
क्या कहते हैं सांसद
सांसद राघव लखन पाल शर्मा का कहना है कि गांव में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही आपसी साैहार्द कायम कराया जा रहा है। स्कूल आैर चिकित्सा व्यवस्था के साथ-साथ पीने के पानी की व्यस्था के लिए भी प्लान तैयार कर लिया गया है।
Published on:
22 Dec 2018 08:34 am
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