23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रूस में आयोजित विश्व स्तरीय कौशल प्रतियोगिता में कास्ट कला कारीगरों को जाने की नहीं मिली इजाजत

लकड़ी के बेजान टुकड़ों में जीवन भरकर विश्व स्तर पर सहारनपुर को पहचान दिलाने वाले काष्ठ कला उद्योग के कारीगरों के लिए बुरी खबर

2 min read
Google source verification
Wood artist

सहारनपुर. अपने नक्काशी वाले हुनर से लकड़ी के बेजान टुकड़ों में जीवन भरकर विश्व स्तर पर सहारनपुर को पहचान दिलाने वाले काष्ठ कला उद्योग के कारीगरों के लिए बुरी खबर है। इस बार उन्हें विश्व स्तरीय कौशल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिलेगा। वर्ष 2019 में रूस में यह प्रतियोगिता आयोजित होनी है, जिसके लिए 30 नवंबर तक प्रत्येक जिलों से हुनरमंदों से आवेदन मांगे गए हैं।


गौरतलब है कि सहारनपुर काष्ठ कला उद्योग के बल पर पूरे विश्व में अपनी पहचान काष्ठ नगरी के रूप में रखता है। सहारनपुर को यह पहचान लकड़ी के कारीगरों के हुनर से मिली है, जो लकड़ी के बेजान टुकड़ों में अपने हुनर से जान फूंक देते हैं और उनसे जीवंत आकृतियां बना कर विश्व पटल पर सहारनपुर को पहचान दिलाते हैं। सहारनपुर के कास्ट कला उद्योग से जुड़े एक्सपोर्टर्स और बड़े व्यापारी यह मानते हैं कि सहारनपुर के कारीगरों के पास जो हुनर है। वह दुनिया भर के दूसरे देशों में कही नहीं है। ऐसे में यदि सहारनपुर के कास्ट कला उद्योग से जुड़े कारीगरों को विश्व स्तरीय कौशल प्रतियोगिता में जाने का मौका दिया जाता तो वह सहारनपुर का ही, नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करते।

इस बार सहारनपुर जिले से वेल्डिंग में निपुण और ऑटोमोबाइल सेक्टर में निपुण युवाओं से ही इस बार आवेदन मांगे गए हैं। यानी साफ है कि काष्ठ कला उद्योग से जुड़े कारीगर इस विश्व स्तरीय कौशल प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। सहारनपुर से केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर और वेल्डिंग सेक्टर से जुड़े कुशल कारीगर ही इस प्रतियोगिता के लिए आवेदन कर सकेंगे।

सहारनपुर वूड कार्विंग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के महासचिव शाह जमा का कहना है कि यह सहारनपुर के काष्ठ कला उद्योग से जुड़े उन सभी कारीगरों के साथ धोखा है जिन्होंने सहारनपुर को विश्व पटल पर अलग पहचान दिलाई है। उन्होंने यह भी कहा कि सहारनपुर वुड कार्विंग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन यह मांग करती है कि सहारनपुर से काष्ठ कला उद्योग के कारीगरों के भी आवेदन कराए जाएं ताकि वह सहारनपुर के साथ-साथ विश्व में भारत देश का नाम भी रोशन कर सकें।