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वर्ल्ड स्ट्रोक डे: कोरोना मरीजों के लिए लकवे का अटैक और भी घातक

Highlights ब्रेन स्ट्रोक ( पैरालाइसिस ) में पहले तीन घंटे बेहद महत्वपूर्ण लेट इलाज जीवनभर के लिए बना सकता है अपाहिज

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Brain Stroke: जानिए क्यों होता है ब्रेन स्ट्रोक, कैसे करें पहचान और उपचार

brain stroke

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
सहारनपुर। पैरालाइसिस का अटैक आने पर पहले तीन घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर इन तीन घंटों के भीतर रोगी को सही उपचार मिल जाए तो वह पूरी तरह से ठीक हो सकता है। इसके विपरीत अगर पहले तीन घंटे बीत जाते हैं तो इलाज में देरी होने की वजह से मरीज जीवनभर के लिए अपाहिज भी बन सकता है।

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गुरुवार आज पूरी में दुनिया वर्ल्ड स्ट्रोक- डे मनाया जा रहा है। ब्रेन स्ट्रोक को पैरालाइसिस और लकवा भी कहा जाता है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर संजीव मिगलानी के अनुसार देश में ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी तेजी से अपने पैर पसार रही है। 40 साल की उम्र के बाद के लोगों में ब्रेन स्ट्रोक यानी पैरालाइसिस होने का खतरा अधिक होता है लेकिन हाल ही में जो सर्वे रिपोर्ट आई है वह बेहद चौका देने वाली है। अब 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों को भी लकवा हो रहा है। डॉक्टर में अनुसार ब्रेन स्ट्रोक या लकवा या पैरालाइसिस होने पर पहले तीन घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। पैरालाइसिस अटैक होने पर तुरंत चिकित्सक के पास जाना चाहिए। अगर तीन घंटे में इलाज मिल जाता है तो रोगी को पूरी तरह से स्वस्थ किया जा सकता है।


इन वजहों से होता है ब्रेन स्ट्रोक
लकवे के पीछे कई तरह की अवधारणाएं हैं लेकिन हाई ब्लड प्रेशर इसका सबसे बड़ा कारण है। इसके बाद डायबिटीज यानी मधुमेह के रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका अधिक रहती है। जिन लोगों की बॉडी में कोलेस्ट्रोल हाई है उनको भी इसकी अधिक आशंका रहती है। अधिक धूम्रपान करने वालो और हार्ट रोगियों को भी ब्रेन स्ट्रोक का खतरा रहता है। इसके साथ ही अगर फैमिली में कोई हिस्ट्री है यानी परिवार के किसी अन्य सदस्य को लकवा हुआ है तो परिवार के दूसरे सदस्यों को भी आशंकाएं बनी रहती हैं।


पैरालाइसिस के मरीजों के लिए परहेज बेहद आवश्यक
पैरालाइसिस के मरीजों को परहेज रखना चाहिए। उन्हें तली हुई खाने की वस्तुओं से बचना चाहिए। खाने में उन्हें हरी सब्जियां खानी चाहिए। सप्ताह में कम से कम दो बार मछलियां खानी चाहिए। साबुत अनाज और दाल भी उनके लिए अच्छी होती है।

ये हैं पैरालाइसिस अटैक के लक्षण
अटैक आने पर शरीर के एक हिस्से में तेजी से कमजोरी आती है। ठीक से चलता फिरता आदमी अचानक लड़खड़ा
ने लगता है। आंखों के सामने धुंधलापन हो जाता है या फिर दो-दो चीजें दिखाई देने लगती हैं। जुबान लड़खड़ाने लगती है और तुतलापन आ जाता है। हाथ-पैर सुन होने लगते हैं और चेहरे पर भी टेढ़ापन होने लगता है।

ऐसे करें पुष्ट
अगर आपको ऐसे कोई लक्षण दिखाई देते हैं और पुष्ट करना चाहते हैं कि पैरालाइसिस अटैक है या नहीं तो इसके लिए रोगी को अपने मुंह में हवा भरने के लिए कहें। इसके बाद उसे जोर से दोनों गालो को फुलाने के लिए बोले अगर पैरालाइसिस अटैक होगा तो रोगी मुंह में हवा नहीं भर पाएगा। मुँह के एक साइड से उसकी हवा निकल जाएगी।

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पैरालाइसिस अटैक होने पर रोगी अपने मुंह को टाइट बंद नहीं कर पाता है। एक दूसरा आसान तरीका यह भी है कि रोगी के हाथ में अपने दोनों हाथ दीजिए और उससे कहें कि दोनों हाथों को टाइट पकड़ ले। फिर आप रोगी से अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश करेंगे तो एक हाथ से वह आपके हाथ को ढीला ही पकड़ पायेगा और आसानी से आप अपना हाथ छुड़ा पाओगे। इससे पता चल जाएगा कि रोगी को लकवे का अटैक हुआ है


पैरालाइसिस से बचने के लिए करें यह उपाय

आगरा पैरालाइसिस अटैक से बचना चाहते हैं तो अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें और उसकी समय-समय पर जांच करते रहें। शुगर रोगी अपने शुगर को कंट्रोल रखें। मोटापा न बढ़ने दें मोटापा बढ़ने से इसकी आशंका बढ़ जाती है। प्रतिदिन व्यक्ति को कम से कम आधे घंटे टहलना चाहिए। शराब का सेवन करने से भी बचें। धूम्रपान न करें और बर्गर चाऊमीन पिज़्ज़ा जैसे फास्ट फूड खाने से बचें।