
18 दिन बाद जिंदा लौटा युवक..
Dead man found alive Sambhal: यूपी के संभल जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन और आम लोगों को हैरानी में डाल दिया है। यहां एक युवक को मृत मानकर पूरे विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, तेरहवीं तक कर दी गई, लेकिन 18 दिन बाद वही युवक जिंदा मिल गया। इस घटना ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी रहस्य बना दिया है कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था।
मामला चंदौसी तहसील के बहजोई कस्बा क्षेत्र स्थित निर्माणाधीन चांदनी चौक मार्केट से जुड़ा है। बीते 24 दिसंबर को यहां एक खंडहरनुमा मार्केट में एक युवक का शव मिला था। शव गंभीर रूप से घायल अवस्था में था, उसके सिर को ईंट से कुचलकर हत्या की गई थी और सिर के पिछले हिस्से पर गहरे घाव के निशान पाए गए थे। शव के पास एक बैग भी बरामद हुआ था।
पुलिस ने शव मिलने के बाद उसकी शिनाख्त के प्रयास शुरू किए। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई और शव की तस्वीरें सर्कुलेट की गईं। बाद में परिजनों ने शव की पहचान बहजोई के गोलागंज निवासी सुशील कुमार के रूप में की। शव के हाथ पर बना टैटू, उसकी उम्र, कद-काठी और चेहरे की बनावट काफी हद तक सुशील से मेल खा रही थी। वहीं, मौके से मिला बैग भी वैसा ही था, जैसा सुशील आमतौर पर इस्तेमाल करता था।
सूचना मिलने पर सुशील की बहन बदायूं से और उसके भाई अनिल कुमार व पप्पू काशीपुर (उत्तराखंड) से बहजोई पहुंचे। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों भाइयों ने बहजोई के काली मंदिर स्थित श्मशान घाट पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद परिवार ने तेरहवीं संस्कार भी किया, जिस पर अनिल कुमार के अनुसार करीब 15 हजार रुपये खर्च हुए।
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि सुशील का आपराधिक रिकॉर्ड था और उसके खिलाफ एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज थे। इसी कारण परिवार उससे लंबे समय से दूरी बनाए हुए था। यही वजह रही कि शुरुआत में उसकी गुमशुदगी या हत्या को लेकर परिवार ने सक्रियता नहीं दिखाई और कोई ठोस शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई।
इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि सुशील जिंदा है और बहजोई के आसपास देखा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और उसकी तलाश तेज कर दी गई। बीते मंगलवार को पुलिस ने सुशील को एक चौराहे से बरामद कर लिया। जिंदा सुशील को देख पुलिस भी असमंजस में पड़ गई।
पुलिस सुशील को थाने लेकर पहुंची और बदायूं से उसकी बहन को बुलाया गया। बहन ने थाने में ही उसकी जिंदा पहचान कर ली। इसके बाद पुलिस ने सुशील को औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर उसकी बहन के सुपुर्द कर दिया।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस युवक का शव मिला था और जिसे सुशील समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, वह आखिर कौन था। पुलिस अब उस अज्ञात शव की असली पहचान करने में जुट गई है और यह भी जांच की जा रही है कि शिनाख्त में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
पुलिस ने बताया कि हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है। वहीं एएसपी (दक्षिणी) अनुकृति शर्मा ने कहा कि 18 दिन पहले मिले शव की पहचान परिवार के लोगों ने ही सुशील के रूप में की थी। फोटो सर्कुलेट कराए गए थे, लेकिन विवेचना के दौरान अब वह व्यक्ति जिंदा मिला है। पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जा रही है और जल्द ही सच सामने लाया जाएगा।
Published on:
14 Jan 2026 03:23 pm
बड़ी खबरें
View Allसम्भल
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
