27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शंकराचार्य को लेकर सियासी और धार्मिक साजिश, ‘शुक्राचार्य’ बनाने की कोशिश हो रही है- आचार्य प्रमोद कृष्णम्

Sambhal News: यूपी के संभल में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान श्रीकल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर बड़ा बयान दिया।

2 min read
Google source verification

सम्भल

image

Mohd Danish

Jan 27, 2026

pramod krishnam statement on shankaracharya sambhal

शंकराचार्य को लेकर सियासी और धार्मिक साजिश | Image - FB/@AcharyaPramodINC

Pramod Krishnam Statement: संभल में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान श्रीकल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर एक बड़ा बयान दिया। मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को हठ छोड़कर अपने मठ की ओर लौटना चाहिए और ऐसे किसी भी रास्ते पर नहीं चलना चाहिए जो देश की एकता और सनातन परंपरा को कमजोर करने का कारण बने। उनके इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

‘शुक्राचार्य’ बनाने की साजिश का आरोप

आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें जानबूझकर शंकराचार्य की छवि को एक खास दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को ‘शुक्राचार्य’ बनाने की साजिश रची जा रही है, ताकि सनातन परंपरा और देश की एकता को प्रभावित किया जा सके। उनके अनुसार, यह केवल धार्मिक मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक सोच और रणनीति काम कर रही है।

भारत की एकता को लेकर जताई चिंता

अपने संबोधन में आचार्य कृष्णम् ने कहा कि जो लोग देश को तोड़ना चाहते हैं, वे चाहते हैं कि धार्मिक नेतृत्व के माध्यम से समाज में भ्रम और विभाजन पैदा किया जाए। उन्होंने शंकराचार्य से अपील की कि वे ऐसे किसी भी षड्यंत्र का हिस्सा न बनें जो भारत की अखंडता और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकता है।

सनातन परंपरा की रक्षा की अपील

आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने जोर देकर कहा कि सनातन परंपरा केवल एक धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। उन्होंने शंकराचार्य से निवेदन किया कि वे इस परंपरा की मर्यादा और गरिमा को बनाए रखें और किसी भी तरह की राजनीतिक या वैचारिक खींचतान से दूर रहें।

बयान के बाद बढ़ी हलचल

इस बयान के बाद स्थानीय स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। समर्थक इसे सनातन और राष्ट्रीय एकता के पक्ष में उठाई गई आवाज बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे धार्मिक मामलों में अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।