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सपा की बैठक से गायब रहे दो बड़े मुस्लिम चेहरे, कैसे जीतेंगे 2024 का चुनाव?

Samajwadi Party National Executive Meeting: आजम खान और शफीकुर्रहमान बर्क उन 5 नेताओं में से थे, जो 2019 में भाजपा की लहर के बावजूद सपा से सांसद बने थे।  

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Azam khan

पूर्व मंत्री आजम खान (काले चश्मे में), संभल के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क(दायें)

समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कोलकाता में चल रही है। बैठक में पार्टी के दो सबसे सीनियर मुस्लिम नेताओं का ना पहुंचना चर्चा में है। इसमें एक पूर्व सांसद आजम खान हैं तो दूसरे संभल के MP शफीकुर्रहमान बर्क हैं।


शफीकुर्रहमान बोले- पहले बुलाते थे, अबकी बार बुलाया ही नहीं
कोलकाता में चल रही बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के अलावा संगठन के बड़े पदाधिकारी भी पहुचे हैं। इनमें पार्टी के सबसे सीनियर सांसद शफीकुर्रहमान शामिल नहीं हैं। बर्क इन दिनों संभल में ही हैं।

बर्क ने एक चैनल से बातचीत में कहा कि वह इस बैठक की सफलता की कामना करते हैं। साथ ही उन्होंने विपक्षी एकता पर जोर दिया। सपा की बैठक में ना जाने पर पहले तो उन्होंने तबीयत खराब होने की बात कही। फिर कुछ देर बाद उन्होंने कह दिया कि जब मुझे न्योता ही नहीं मिला तो बिना बुलाए कैसे जाता। हालांकि पार्टी या अखिलेश यादव से नाराजगी की बात को उन्होंने नकार दिया।


आजम खान तबीयत खराब होने की वजह से नहीं गए बैठक में
सपा के संस्थापक सदस्यों में से एक आजम खान भी बैठक में नहीं गए हैं। सपा के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरा कहे जाने वाले आजम अखिलेश और मुलायम सिंह की सरकार में नंबर-2 का हैसियत वाले नेता कहे जाते थे। पूर्व सांसद आजम खान सपा के महासचिव भी हैं। उनके बैठक में ना आने की वजह उनकी खराब सेहत बताई गई है।

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आजम खान भले बैठक में नहीं हैं लेकिन सपा की कार्यकारिणी में पास हुए प्रस्ताव में उनका नाम है। सपा के प्रस्ताव में कहा गया है कि यूपी की बीजेपी सरकार आजम खान, उनके बेटे अब्दुल्ला और पत्नी तंजीन फातिमा को प्रताड़ित कर रही है। साथ ही राजनीतिक बदले की कार्रवाई में जौहर यूनिवर्सिटी को भी तबाह किया जा रहा है।


बर्क और आजम क्यों सपा के लिए अहम?
आजम खान और शफीकुर्रहमान का बैठक में ना जाना थोड़ा हैरान करने वाला है। इसकी वजह इन दोनों नेताओं का राजनीतिक कद है। 2019 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो सपा ने 5 सीटें जीती थीं। इनमें दो सीटों पर अखिलेश यादव और मुलायम सिंह थे। बाकी तीन पर आजम खान, शफीकुर्रहमान बर्क और एसटी हसन जीते थे। दोनों नेताओं का अपने जिलों में अच्छा राजनीतिक कद है। 2024 में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रही सपा से अगर ये नेता छिटकते हैं तो पार्टी के लिए बड़ा नुकसान हो सकता है।

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