
जुमे से पहले संभल में बुलडोजर एक्शन..
Illegal mosque minaret demolition: संभल के मुबारकपुर बंद गांव में शुक्रवार सुबह से ही प्रशासनिक हलचल तेज हो गई थी। जुमे की नमाज से ठीक पहले अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और मशीनों की आवाज के बीच पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो सके।
कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को निशाना बनाया, जो दूर-दूर तक इस निर्माण की पहचान बनी हुई थी। दोपहर करीब डेढ़ बजे क्रेन और हाइड्रा मशीनों की मदद से मीनार को गिरा दिया गया। जैसे ही मीनार जमीन पर गिरी, पूरे इलाके में प्रशासन का सख्त संदेश साफ तौर पर महसूस किया गया कि अवैध कब्जे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
मीनार को गिराने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया। एक मजदूर मीनार पर चढ़ा और रस्सी बांधी गई, जिसके दूसरे सिरे को दो हाइड्रा मशीनों से जोड़ा गया। इसके बाद खींचकर मीनार को नियंत्रित तरीके से गिराया गया। यह पूरी प्रक्रिया प्रशासन की निगरानी में सावधानीपूर्वक अंजाम दी गई ताकि आसपास के ढांचों को नुकसान न पहुंचे।
मस्जिद की मीनार गिराने से पहले सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक आसपास बनी कई दुकानों को भी ध्वस्त किया गया। इसके बाद बुलडोजर ने मस्जिद के अन्य हिस्सों पर कार्रवाई शुरू कर दी। पूरे ऑपरेशन को चरणबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया, जिससे कानून-व्यवस्था बनी रही और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।
प्रशासन के अनुसार, मुबारकपुर बंद गांव में करीब 15 साल पहले सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। वहीं लगभग 27 साल पहले इस जमीन पर अवैध कब्जा शुरू हुआ था। कुल 150 वर्गमीटर क्षेत्र में मस्जिद के साथ पांच दुकानें और आठ मकान भी बनाए गए थे। हैरानी की बात यह रही कि इसी जमीन पर दो सरकारी प्राइमरी स्कूल भी बना दिए गए थे, जिससे स्थिति और जटिल हो गई थी।
अवैध कब्जे की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने तहसील कोर्ट में मामला दर्ज कराया। 28 मार्च को नोटिस जारी किया गया और उसी दिन जमीन की नाप कराई गई। 30 मार्च से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इसके बाद 31 मार्च से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुद ही मदरसा और दुकानों को तोड़ना शुरू किया, लेकिन कार्य अधूरा रह गया।
मस्जिद कमेटी और ग्राम प्रधानपति हाजी मुनव्वर की मांग पर 5 अप्रैल को प्रशासन ने शुल्क लेकर मदरसा और दुकानों को हटवाया। यह कार्रवाई सीमित समय में पूरी की गई, लेकिन इसके बाद भी कुछ हिस्से बचे हुए थे, जिन पर अब प्रशासन ने सख्ती दिखाई और बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से अवैध निर्माण को हटाया।
डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि यह अवैध निर्माण स्कूलों के बीच स्थित खेल मैदान और खाद के गड्ढे की करीब 600 वर्गमीटर भूमि पर था। इस कब्जे के कारण दोनों स्कूल एक-दूसरे से अलग हो गए थे। अब कब्जा हटने के बाद दोनों स्कूलों के बीच का रास्ता खुल गया है और छात्र खेल मैदान का उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने साफ कहा कि जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा होगा, वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
Published on:
17 Apr 2026 07:23 pm
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