4 जून 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CM योगी के मंत्री का अपराधियों को सख्त संदेश, कहा- सिर उठाया तो जहन्नुम का टिकट तय, 1978 के दंगा पीड़ितों को सौंपे जमीन के दस्तावेज

UP Sambhal News: संभल में 48 साल बाद लौटा दंगा पीड़ित परिवार! योगी सरकार ने 1978 के दंगा पीड़ित रस्तोगी परिवार को 48 साल बाद वापस बसाया। अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर उन्हें 100 वर्ग मीटर का पट्टा सौंपा गया है। जानिए पूरा मामला...

3 min read
Google source verification

सम्भल

image

Mohsina Bano

Jun 04, 2026

Sambhal riot 1978, Yogi Adityanath, Rastogi family Sambhal, up news

48 साल बाद रस्तोगी परिवार को मिला इंसाफ (फोटो- पत्रिका)

Sambhal Riot Victims:उत्तर प्रदेश के संभल में 1978 के सांप्रदायिक दंगों में अपना सब कुछ खोकर पलायन करने वाले रस्तोगी परिवार को 48 साल बाद आखिरकार इंसाफ मिल गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर 10 महीने पहले कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर दंगा पीड़ित परिवार को 100 वर्ग मीटर का पट्टा आवंटित कर दिया गया है। गुरुवार को यूपी सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में हवन पूजन के साथ परिवार के नए आशियाने की नींव रखी गई। पट्टा मिलने के बाद पीड़ित परिवार के चेहरे खिल गए हैं।

क्या है 1978 दंगे की कहानी?

24 नवंबर 2024 की हिंसा के बाद संभल में 1978 के दंगे का खौफनाक सच सामने आया था। 1978 में दंगाइयों ने राम सरन दास रस्तोगी की उनकी दुकान पर चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी थी। इतना ही नहीं, आरिपियों ने शव के टुकड़े करके उसे तराजू से बांधा और दुकान के सामने वाले कुएं में फेंक दिया गया था। तीन दिन बाद शव बरामद हुआ तो उस पर चाकू के 109 निशान थे। इसके बाद लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर रस्तोगी परिवार ने संभल से पलायन कर लिया था।

अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई थी जमीन

संभल हिंसा के बाद इस पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पलायन के बाद दोबारा बसने की गुहार लगाई थी। रस्तोगी परिवार को जो जमीन दी गई है वह, शेर खां सराय इलाके में स्थित है। यह यह सरकारी भूमि है, जिसे प्रशासन ने 10 महीने पहले 12 अगस्त 2025 को कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से बुलडोजर चलाकर मुक्त कराया था।

वैदिक रीति-रिवाज से हुआ भूमि पूजन

गुरुवार को इस ऐतिहासिक मौके पर मृतक राम सरन दास रस्तोगी की पुत्रवधू रुक्मन रस्तोगी और पौत्र कपिल रस्तोगी को जमीन आवंटन का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा गया। पट्टा देने से पहले इस कब्जा मुक्त हुई जमीन पर दंगा पीड़ित परिवार से बाकायदा वैदिक रीति-रिवाज से हवन पूजन कराया गया। इसमें मुख्य अतिथि मंत्री जेपीएस राठौर, मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह, संभल के DM अंकित खंडेलवाल और SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने भी आहुतियां दीं।

मंत्री राठौर की चेतावनी- सिर उठाया तो जहन्नुम का टिकट तय

समारोह में कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि एक साल पहले पीड़ित परिवार ने संपर्क किया था। इसके बाद मुरादाबाद से पुरानी पत्रावलियां निकालकर शासन को भेजी गईं थी। मुख्यमंत्री के साफ निर्देश हैं कि जो भी दंगा पीड़ित परिवार संभल में वापस बसना चाहता है, प्रशासन उसकी पूरी मदद करेगा। इसके साथ ही जमीन भी आवंटित की जाएगी। वहीं यूपी सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आज संभल को असली आजादी मिली है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब अगर किसी ने सिर उठाया तो उसका जहन्नुम का टिकट कटना तय है।

48 साल बाद मिला इंसाफ

पट्टा मिलने के बाद मृतक के पोते कपिल रस्तोगी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि 48 साल तक किसी भी सरकार ने हमारी सुध नहीं ली। उस समय की सरकार और इंदिरा गांधी ने सिर्फ आश्वासन दिए थे लेकिन योगी सरकार में हमें असली इंसाफ मिला है। परिवार ने मांग की है कि, पुराने दंगाइयों को सख्त सजा मिले। इसके साथ ही जिस कुएं से उनके दादा का शव मिला था उसका सौंदर्यीकरण कराकर उस चौराहे का नाम राम सरन दास रस्तोगी के नाम पर रखा जाए।

सियासी घमासान भी जारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में मथुरा के एक कार्यक्रम में 1976 और 1978 के दंगों का जिक्र करते हुए कहा था कि तब कई हिंदू मारे गए थे लेकिन सपा सरकार ने दंगाइयों के मुकदमे वापस ले लिए थे। उन्होंने पीड़ित परिवार को संपत्ति वापस दिलाने का भरोसा दिया था। दूसरी तरफ 12 अगस्त, 2025 को जब इस कब्रिस्तान पर बुलडोजर चला था तब भी सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद ने विधानसभा में इसे लेकर सरकार को घेराव किया था।