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जामा मस्जिद में दिखेगी रमजान की रौनक, पुताई के लिए ASI से मांगी इजाजत; पिछली पुताई खराब होने का हवाला

Sambhal News: संभल की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई और सजावट की अनुमति के लिए एएसआई को पत्र भेजा गया है।

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सम्भल

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Mohd Danish

Feb 19, 2026

sambhal jama masjid asi painting ramadan

जामा मस्जिद में दिखेगी रमजान की रौनक..

Sambhal Jama Masjid Painting: संभल की इंतजामिया कमेटी ने रमजान शुरू होने से पहले मस्जिद की रंगाई-पुताई और सजावट कराने की अनुमति के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को औपचारिक पत्र भेजा है। कमेटी का कहना है कि रमजान के पाक महीने में मस्जिद की साफ-सफाई और सजावट धार्मिक दृष्टि से जरूरी होती है, ताकि नमाजियों को बेहतर और स्वच्छ वातावरण मिल सके।

एएसआई को भेजा गया औपचारिक अनुरोध

मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने एएसआई के सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट को लिखे पत्र में साफ तौर पर उल्लेख किया है कि मस्जिद की पिछली पुताई अब खराब हो चुकी है। पत्र में कहा गया है कि बीते साल धूल, बारिश और मौसम के प्रभाव से रंग उखड़ गया है, जिससे मस्जिद की दीवारों की हालत खराब दिखने लगी है। ऐसे में रमजान से पहले मरम्मत और सजावट जरूरी हो गई है।

पिछली पुताई खराब होने का हवाला

कमेटी ने अपने पत्र में यह भी बताया कि पिछले वर्ष उच्च न्यायालय के आदेश पर कराई गई पुताई अब लगभग नष्ट हो चुकी है। दीवारों पर जगह-जगह रंग उड़ चुका है और सीलन के निशान भी दिखाई दे रहे हैं। कमेटी का दावा है कि पुताई केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि संरचना को सुरक्षित रखने के लिए भी जरूरी है, ताकि ऐतिहासिक इमारत को नुकसान न पहुंचे।

लाउडस्पीकर विवाद और प्रशासन का रुख

कुछ समय पहले मस्जिद कमेटी ने जिला प्रशासन से रमजान के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि प्रशासन ने यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि मस्जिद को लेकर मंदिर होने का दावा न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन का कहना है कि जब तक मामला अदालत में लंबित है, तब तक किसी भी प्रकार की अतिरिक्त अनुमति देना उचित नहीं है।

पिछले साल भी अदालत तक पहुंचा था मामला

यह पहला मौका नहीं है जब जामा मस्जिद की पुताई का मुद्दा विवादों में आया हो। पिछले वर्ष भी रमजान से पहले एएसआई से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन इजाजत नहीं मिलने पर मस्जिद कमेटी ने मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंचाया था। अदालत के आदेश के बाद ही पुताई का कार्य शुरू हो सका था।

हरे रंग को लेकर हुआ था विरोध

पिछली बार जब मस्जिद की रंगाई-पुताई कराई गई थी, तब दीवारों पर हरे रंग के इस्तेमाल को लेकर हिंदू पक्ष ने आपत्ति जताई थी। इस पर काफी विवाद हुआ था और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा था। दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी थी, जिसके बाद रंग को लेकर शर्तें तय की गई थीं।

कानूनी पेंच और धार्मिक भावनाएं आमने-सामने

इस पूरे मामले में एक तरफ धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर कानूनी प्रक्रियाएं आड़े आ रही हैं। एएसआई के अधीन होने के कारण किसी भी तरह की मरम्मत या बदलाव के लिए अनुमति जरूरी है। अब देखना होगा कि इस साल रमजान में मस्जिद की पुताई और सजावट को हरी झंडी मिलती है या फिर एक बार फिर मामला अदालत की चौखट तक पहुंचेगा।