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Sambhal News: 14 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले को 20 साल की कैद, कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा

Sambhal News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में चंदौसी की एक विशेष अदालत (पॉक्सो एक्ट) ने 14 वर्षीय नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के प्रयास के मामले में कड़ा फैसला सुनाया है।
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सम्भल

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Mohd Danish

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Updated: 19 Mar 2026, 7:24 PM IST

sambhal minor rape conviction 20 years jail

Sambhal News: 14 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले को 20 साल की कैद | Image Source - Pexels

Sambhal News Today: संभल जिले के असमोली थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया, जहां महज़ एक बकरी के बच्चे को लेकर हुए मामूली विवाद ने इतना भयानक रूप ले लिया कि एक मासूम की गरिमा और जान पर बन आई। यह विवाद साल 2019 का है, जब दोषी नसीम और पीड़ित परिवार के बीच कहासुनी हुई थी। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह रंजिश छह महीने बाद एक जघन्य अपराध में तब्दील हो जाएगी। प्रतिशोध की आग में जल रहे नसीम और उसके साथियों ने एक नाबालिग को अपने निशाने पर लिया।

घर की दहलीज लांघकर खेला गया हैवानियत का खेल

घटना 19 अगस्त 2019 की शाम की है, जब पूरा गांव अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त था। शाम करीब चार बजे, जब घर में केवल महिलाएं और बच्चे मौजूद थे, तभी आरोपित नसीम, रिजवान और शाकिब गाली-गलौज करते हुए जबरन घर में घुस आए। विरोध करने पर उन्होंने न केवल मारपीट की, बल्कि मानवता की सारी हदें पार कर दीं। रिजवान ने घर की महिला से छेड़खानी की, जबकि नसीम और शाकिब 14 साल की मासूम को खींचकर कमरे में ले गए, जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया।

मौत के फंदे से लड़कर वापस लौटी पीड़िता

आरोपितों की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी, दुष्कर्म के बाद साक्ष्य मिटाने और पहचान छुपाने की नीयत से उन्होंने किशोरी के गले में फंदा डालकर उसे जान से मारने की कोशिश की। जब किशोरी बेदम होकर गिर गई, तो दरिंदे उसे मृत समझकर मौके से फरार हो गए। आनन-फानन में परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। हालत इतनी नाजुक थी कि उसे पहले मेरठ और फिर दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में हफ्तों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़नी पड़ी। होश आने के बाद ही इस पूरी बर्बरता का खुलासा हो सका।

कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय का कड़ा रुख

चंदौसी स्थित विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह की अदालत में इस मामले की लंबी सुनवाई चली। विशेष लोक अभियोजक आदित्य कुमार सिंह ने पीड़ित पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। मामले में पीड़िता समेत आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए। हालांकि, साक्ष्य के अभाव में तीसरे आरोपी शाकिब को बरी कर दिया गया, लेकिन मुख्य आरोपी नसीम पर लगे आरोप वैज्ञानिक और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर पूरी तरह सिद्ध पाए गए।

20 साल की जेल और भारी जुर्माना

अदालत ने दोषी नसीम को किशोरी से दुष्कर्म और हत्या के प्रयास की धाराओं में दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, उस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले के दौरान दूसरा आरोपी रिजवान अदालत में उपस्थित नहीं था, जिसके चलते न्यायालय ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर पुलिस को उसे जल्द पेश करने का आदेश दिया है। मॉनिटरिंग सेल और पुलिस प्रशासन ने इस सजा को न्याय की बड़ी जीत बताया है।

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