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कानून से ऊपर कोई नहीं, अधिकारी हों या नेता; जवाबदेही होगी तय: संभल हिंसा पर सांसद जियाउर्रहमान बर्क का बयान

Sambhal Violence: संभल हिंसा मामले में अदालत के पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर के आदेश के बाद सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का बयान सामने आया है, जिससे राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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सम्भल

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Mohd Danish

Jan 14, 2026

sambhal violence court order sp mp barq

संभल हिंसा पर सांसद जियाउर्रहमान बर्क का बयान | Image - FB/@ziaurrahmanbarq

SP MP Barq on Sambhal Violence: संभल हिंसा मामले में अदालत के आदेश के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कड़ा और स्पष्ट बयान देते हुए कहा है कि भारत में कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चाहे कोई अधिकारी हो या आम नागरिक, कानून का उल्लंघन करने वाले को जवाबदेह ठहराया जाएगा। सांसद का यह बयान उस समय सामने आया है, जब अदालत ने हिंसा के दौरान गोलीबारी के मामले में कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

अधिकारियों पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप

सांसद बर्क ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि संभल हिंसा के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों ने अपनी संवैधानिक सीमाओं को लांघते हुए शक्ति का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों पर बल प्रयोग किया गया और कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर मानवाधिकारों की अनदेखी हुई। सांसद के अनुसार, लोकतंत्र में किसी भी अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

न्यायपालिका पर भरोसे की दोहराई बात

अपने बयान में सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने लिखा कि वे जुल्म और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे और पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। सांसद ने यह भी संकेत दिया कि यह मामला सिर्फ संभल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।

20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का आदेश

गौरतलब है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर की अदालत ने संभल हिंसा के दौरान हुई गोलीबारी के मामले में एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश हिंसा में घायल हुए युवक आलम के पिता यामीन द्वारा दायर याचिका पर पारित किया गया। अदालत के इस फैसले को कानून के पालन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पुलिस प्रशासन ने अपील की तैयारी की

वहीं, पुलिस प्रशासन की ओर से एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा है कि मामले की न्यायिक जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय अदालत के आदेश के खिलाफ अपील करेगी। प्रशासन का तर्क है कि जांच में सभी तथ्यों को शामिल किया गया है और पुलिस की भूमिका को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।

संभल की राजनीति में फिर उबाल

सांसद के बयान और अदालत के आदेश के बाद संभल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एक ओर विपक्ष इसे न्याय की जीत बता रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।