
संभल जिले के चंदौसी इलाके में मिली लगभग 250 फीट गहरी इस बावड़ी से क्षेत्र में उत्सुकता का माहौल है। इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की संरचना माना जा रहा है। इसकी खुदाई में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
रविवार को खुदाई का कार्य दोबारा शुरू किया गया। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण विश्नोई मौके पर मौजूद रहे। दो जेसीबी मशीनों और मजदूरों की मदद से खुदाई जारी रही। इस प्रक्रिया में चार कक्ष स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो यह बावड़ी तीन मंजिला है और इसमें 12 कमरे, कुआं और एक सुरंग है।
जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि खतौनी के रिकॉर्ड में यह जमीन बावली तालाब के रूप में दर्ज है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह बावड़ी बिलारी की रानी सुरेंद्र बाला देवी की रियासत का हिस्सा है। इस संरचना का दूसरा और तीसरा तल संगमरमर से बना है जबकि ऊपरी हिस्सा ईंटों से बना है। बावड़ी की उम्र लगभग 125-150 साल पुरानी आंकी जा रही है।
दो दिन की खुदाई के दौरान करीब 210 वर्ग मीटर का क्षेत्र उजागर हुआ है। हालांकि इसके बाकी हिस्से पर अतिक्रमण है। मिट्टी हटाने का कार्य सावधानीपूर्वक किया जा रहा है ताकि संरचना को कोई नुकसान न पहुंचे। अब तक चार कमरे और एक कुआं साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
यह खुदाई तब शुरू हुई जब डीएम को एक शिकायत पत्र मिला जिसमें लक्ष्मणगंज क्षेत्र में रानी की बावड़ी होने का दावा किया गया था। इस शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए गए। नायब तहसीलदार धीरेन्द्र सिंह नक्शे के साथ इलाके में पहुंचे और खुदाई के दौरान प्राचीन इमारत के अवशेष पाए गए।
यह बावड़ी न केवल स्थानीय इतिहास को उजागर करती है बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को भी सहेजने का अवसर प्रदान करती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार यह संरचना 1857 के आसपास की है और बिलारी के राजा के नाना के समय में बनाई गई थी।
Updated on:
22 Dec 2024 05:02 pm
Published on:
22 Dec 2024 05:02 pm
