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शंकराचार्य विवाद में सरकार पर सपा का हमला: इकबाल महमूद बोले- अब निशाने पर संत और आस्था

Shankaracharya Avimukteshwaranand: सपा विधायक इकबाल महमूद ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रयागराज प्रशासन के बीच विवाद को लेकर यूपी सरकार पर तीखे आरोप लगाए है।

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सम्भल

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Mohd Danish

Jan 27, 2026

sp mla iqbal mahmood supports Shankaracharya Avimukteshwaranand

शंकराचार्य विवाद में सरकार पर सपा का हमला | Image Video Grab

SP MLA Iqbal Mahmood: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक इकबाल महमूद ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रयागराज प्रशासन के बीच चल रहे विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पहले अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बना रही थी और अब अपने ही समाज के प्रतिष्ठित धार्मिक गुरुओं पर भी पाबंदी और दबाव की नीति अपना रही है। महमूद के अनुसार यह रवैया न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित करता है।

प्रशासनिक व्यवहार पर उठाए सवाल

मंगलवार को थाना रायसत्ती क्षेत्र स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्यों के साथ बदतमीजी की गई और धार्मिक आस्था के प्रतीक चोटी को पकड़कर खींचने जैसी घटनाएं सामने आईं। महमूद ने कहा कि धार्मिक व्यक्तियों के साथ इस तरह का व्यवहार न तो किसी भी धर्म की मर्यादा के अनुरूप है और न ही राजनीतिक दृष्टिकोण से उचित। उनका मानना है कि प्रशासन को अपनी सीमाओं में रहकर कार्य करना चाहिए और आस्था से जुड़े मामलों में संयम बरतना चाहिए।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

विधायक इकबाल महमूद ने मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि धार्मिक मामलों में प्रशासनिक दखल से बचा जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि शंकराचार्यों का समाज में अत्यधिक मान-सम्मान है और उनके करोड़ों अनुयायी हैं, जिनकी भावनाएं इस पूरे घटनाक्रम से आहत हो सकती हैं। महमूद के अनुसार सरकार का दायित्व है कि वह समाज के सभी वर्गों के विश्वास को बनाए रखे और किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले संवेदनशीलता दिखाए।

इस्तीफे का संदर्भ और प्रशासनिक असंतोष

अपने बयान में महमूद ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे का भी उल्लेख किया और चेतावनी दी कि यदि यही रवैया जारी रहा, तो उच्च जाति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी अपने पद छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में बढ़ते असंतोष का संकेत है। विधायक के मुताबिक, कई शंकराचार्य और धार्मिक नेता इस मुद्दे पर उनके साथ खड़े हैं और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

विपक्ष की एकजुट प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि इससे पहले समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने भी इसी विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि पहले मुस्लिम समुदाय और उनके धर्मगुरुओं पर दबाव बनाया गया और अब हिंदू समाज के शंकराचार्य भी निशाने पर हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह घटनाक्रम सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है और आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकता है।

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