
Sambhal Violence | Image - Fb/@SambhalPolice
Sambhal Violence UP Govt Challenges:उत्तर प्रदेश सरकार ने संभल हिंसा के दौरान कथित पुलिस फायरिंग मामले में 22 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार की ओर से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश के खिलाफ “रिवीजन पिटीशन” दाखिल की गई है, जिसमें मांग की गई है कि इस आदेश को रद्द किया जाए।
राज्य सरकार का कहना है कि यह आदेश तथ्यों और जांच प्रक्रिया से पहले जारी किया गया है, जिससे पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली और छवि पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इस मामले में तत्कालीन संभल सिटी सर्किल ऑफिसर (सीओ) अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और 20 अन्य पुलिसकर्मियों के नाम एफआईआर दर्ज करने के आदेश में शामिल किए गए थे। यह आदेश 9 जनवरी को सीजेएम विभांशु सुधीर ने पारित किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शाही जामा मस्जिद के कोर्ट-आदेशित सर्वे के विरोध में हुई हिंसा के दौरान पुलिस ने भीड़ पर फायरिंग की, जिससे एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।
मामला 24 नवंबर 2024 का है, जब संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर तनाव बढ़ गया था और देखते ही देखते हालात हिंसक हो गए। इसी दौरान कथित तौर पर पुलिस फायरिंग के आरोप सामने आए। खग्गू सराय निवासी मोहम्मद यामीन ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई कि उनका बेटा आलम मस्जिद के पास ठेले पर बिस्किट बेच रहा था, तभी पुलिस की गोलीबारी में उसे तीन गोलियां लगीं। इस शिकायत के आधार पर सीजेएम ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
संभल के पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस ने किसी भी प्रकार की फायरिंग नहीं की थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता का बेटा आलम स्वयं हिंसा के मामले में आरोपी है। एसपी बिश्नोई ने पुष्टि की कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में रिवीजन पिटीशन दाखिल कर दी है और अब मामले की सुनवाई अदालत में होनी बाकी है।
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में आलम को अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान की है। अदालत के इस फैसले को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां एक ओर शिकायतकर्ता पक्ष इसे न्याय की दिशा में कदम बता रहा है, वहीं पुलिस विभाग का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी।
एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाले सीजेएम विभांशु सुधीर को आदेश के एक सप्ताह बाद ही प्रशासनिक फेरबदल के तहत सुल्तानपुर स्थानांतरित कर दिया गया। इस तबादले को लेकर भी कानूनी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं, तो कुछ इसे मामले से जोड़कर देख रहे हैं।
राज्य सरकार के साथ-साथ जिन पुलिस अधिकारियों के नाम एफआईआर आदेश में शामिल हैं, उन्होंने भी व्यक्तिगत तौर पर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं में उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज कराने के आदेश को चुनौती देते हुए राहत की मांग की है। अब सभी की निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले की दिशा तय होने की उम्मीद है।
Updated on:
30 Jan 2026, 2:22 PM IST
Published on:
30 Jan 2026, 2:22 PM IST
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