
रायबरेली. रायबरेली की बात आते ही हर किसी के जहन में एक ही पार्टी की बात आती है कि यह तो कांग्रेस का गढ़ है। क्योंकि रायबरेली सदर विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कई बार जीत हासिल की है, लेकिन इस सीट पर व्यक्ति विशेष का भी दबदबा रहा है, जिनका नाम बाहुबली अखिलेश कुमार सिंह है। 1993 के विधानसभा चुनाव के बाद से इस सीट पर अखिलेश कुमार सिंह ने एकछत्र राज किया है। बाहुबली अखिलेश कुमार सिंह का वर्चस्व ही है कि मौजूदा विधायक उनकी बेटी अदिति सिंह हैं, जो हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। पूरी उम्मीद है कि भाजपा इस सीट पर अदिति सिंह को ही चुनाव मैदान में उतारेगी। इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि पहली बार कांग्रेस के गढ़ में भाजपा का कमल खिलने वाला है। वहीं, विकास के मामले में यह जिला अभी भी बहुत पीछे है। पत्रिका का संवाद सेतु के कार्यक्रम में जनता की बात सरकार और सरकार की बात जनता तक पहुंचाने के लिए रायबरेली में 12 दिसंबर, रविवार को 'पत्रिका' ग्रुप के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध लोग भी एकत्र होते हैं। इस दौरान कम से कम जिले की पांच प्रमुख समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी
दरअसल, वर्तमान में उत्तर प्रदेश की बहुप्रतीक्षित सीट से कांग्रेस से अदिति सिंह विधायक हैं, लेकिन फिलहाल अदिति सिंह ने कांग्रेस से से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुकी हैं। अदिति सिंह ने 2017 में इस सीट से विजय पताका फहराई थी। उन्होंने बसपा के उम्मीदवार मोहम्मद शाहबाज खान को 89163 मतों से पराजित किया था। जबकि भाजपा प्रत्याशी अनीता श्रीवास्तव भाजपा महज 28821 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रही थीं। कुल मतदाताओं की बात करें तो 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां 3,46,370 मतदाता हैं, जिनमें से 1,83,000 पुरुष और 1,63,359 महिलाएं हैं। जबकि ट्रांसजेंडर्स की संख्या महज 11 है। रायबरेली सदर विधानसभा सीट पर सबसे अधिक बार बाहुबली अखिलेश कुमार सिंह ने पांच बार चुनाव जीतकर इतिहास रच चुके हैं। वह तीन बार कांग्रेस के टिकट पर तो एक बार पीस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते हैं। जबकि एक बार निर्दलीय जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।
प्रमुख समस्याएं
रायबरेली सदर विधानसभा इलाके की प्रमुख समस्या कि बात करें तो यहां पेयजल की गंभीर समस्या है। ग्रामीण के साथ शहरी क्षेत्र के पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा काफी ज्यादा है। आईटीआई जैसे संस्थान बंद होने के कारण युवा बेराेजगारी से जूझ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के जमाने में स्थापित केंद्रों की हालत भी बेहद खस्ता है। एनटीपीसी, एम्स, रेल कारखाना, निफ्ट और फ्लाइंग यूनिवर्सिटी का लाभ भी स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही कई इलाकों में सड़कों की हालत बेहद जर्जर है।
कमल खिलने की प्रबल संभावना
बता दें कि 2012 के विधानसभा चुनावों में बाहुबली अखिलेश कुमार सिंह ने पीस पार्टी के टिकट अंतिम बार चुनाव जीता था। इसके बाद गंभीर बीमारी के कारण उन्होंने 2017 में अपनी सबसे बड़ी पुत्री अदिति सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। ये अखिलेश कुमार सिंह का वर्चस्व ही था कि अदिति सिंह ने एक लाख से कुछ कम मतों से चुनाव में विजय पताका फहराई। इसके बाद अगस्त 2019 में अखिलेश सिंह निधन हो गया। मौजूदा समय मे अदिति सिंह भाजपा का दामन थाम चुकी हैं। इसलिए इस बार इस सीट से कमल खिलने की प्रबल संभावना है।
कांग्रेस के गढ़ में आखिरी कील!
वोटों के गणित की बात करें तो रायबरेली सीट से 32 प्रतिशत के करीब दलित तो 30 फीसदी पिछड़े वर्ग के मतदाता हैं। जबकि 12 फीसदी मुस्लिम और 26 प्रतिशत सामान्य मतदाता हैं। इसके बावजूद इस सीट सिंह परिवार का दबदबा रहा है। अब देखने वाली बात ये होगी कि इस सीट पर फिर से सिंह परिवार जीत हासिल करता है या नहीं। अगर अदिति सिंह यह चुनाव जीती तो यूपी के साथ ही कांग्रेस के गढ़ में ये आखिरी कील साबित होगा।
2017 का चुनाव परिणाम
- कांग्रेस प्रत्याशी अदिति सिंह को 128319 मत मिले।
- बसपा प्रत्याशी शाहबाज खान को 39156 मत मिले।
- भाजपा प्रत्याशी अनीता श्रीवास्तव को 28821 मत मिले।
- जीत का अंतर 89163 मतों का रहा।
2012 का चुनाव परिणाम
- पीईसीपी प्रत्याशी अखिलेश कुमार सिंह को 75588 मत मिले।
- सपा प्रत्याशी राम प्रताप यादव को 48443 मत मिले।
- कांग्रेस प्रत्याशी अवधेश बहादुर सिंह को 35660 मत मिले।
- बसपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह को 18809 मत मिले।
- जीत का अंतर 27145 मतों का रहा।
Published on:
11 Dec 2021 12:10 pm
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