संतकबीरनगर. बर्तन के कारोबार के लिए मुरादाबाद की एक अलग पहचान है और इसी तर्ज पर संतकबीरनगर के बखिरा में भी सौ साल से ज्यादा समय से पीतल के बर्तन बनाए जाते हैं जिसे पीतल की नगरी कहा जाता है लेकिन आज यह बखिरा बरतन उद्योग पूरी तरह से टूट चुका है। यहां के कारीगर भुखमरी के कगार पर हैं और योगी सरकार से बखीरा बरतन उद्योग को दोबारा जिंदा करने की आस लगाए बैठे हैं।
वैसे तो संतकबीरनगर बुनकर और किसान बाहुल्य क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, लेकिन यह कम ही लोग जानते होंगे कि संतकबीरनगर के बखिरा में पीतल के बर्तन बनाए जाते हैं और वह भी मुरादाबाद की तर्ज पर जिसे पीतल की नगरी कहा जाता है। सरकारें बदली और निजाम भी बदले, लेकिन नहीं बदले बखिरा बरतन उद्योग और वहां के कारीगरों के हालात। सौ साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है जब से बखिरा में बर्तन का कारोबार होता चला आ रहा है खासकर यहां पर पीतल के बर्तन बनाए जाते थे और यहां के बनाये गए पीतल के बर्तन पूर्वांचल ही नहीं यूपी के कई जिलों में बेचे जाते थे, लेकिन समय बदलता गया और संसाधनों की कमी और सरकारों की उदासीनता की वजह से पीतल की नगरी कहे जाने वाला बखिरा बरतन उद्योग आज पूरी तरह से टूट चुका है और यहां के कारीगर योगी सरकार से आस लगाए बैठे हैं कि उनका बर्तन उद्योग दोबारा से जिंदा होगा।
बता दें कि रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यूपी की योगी सरकार ने ऐसे तमाम चीजें जिससे रोजगार मुहैया हो सके उस पर यूपी सरकार खासा ध्यान दे रही है और इसी कड़ी में यूपी सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत बखिरा के बर्तन उद्योग को चुना है। जिससे बखिरा का बर्तन उद्योग दोबारा अपने अस्तित्व में आ सके और यहां पर जो हजारों कारीगर घर बार छोड़कर बाहर दो रोटी कमाने के लिए मजदूरी करते हैं वह लौटकर अपने घर पर ही रोजगार कर सकें।
अभी कुछ दिनों पहले ही यूपी सरकार यूपी के सभी जिलों में ऐसे उत्पादों को चुन रही है, जिससे रोजगार मुहैया हो सके। संतकबीरनगर में भी बखिरा को पीतल की नगरी कहा जाने वाला बर्तन उद्योग, एक जिला एक उत्पाद के तहत चुना गया है, जिसके बाद से बखिरा के बर्तन उद्योग से जुड़े तमाम लोगों को एक आस जगी है। संतकबीरनगर की एक पहचान जो पूरी तरह से मिटने के कगार पर था उसको दोबारा से जिंदा करने की कोशिश की जा रही है, ऐसे में देखने वाली बात होगी कि यूपी सरकार के द्वारा चुना गया बखिरा का बर्तन उद्योग दोबारा से अपने अस्तित्व में आता है या फिर ऐसे ही दम तोड़ता रहेगा।
BY- NAJMUL HODA