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पूर्वांचल में अजेय रहने के लिए बीजेपी की नजर अब सपा के इन दो दिग्गजों पर

मिशन 2019

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कुशल तिवारी, भालचंद यादव और डॉक्टर अयूब

गोरखपुर। बीजेपी अधिक से अधिक सीटों को जीतने के लिए अपने सांसदों को दरकिनार कर दूसरे दलों के दिग्गज नेताआें को शामिल कराने जा रही है। निषाद नेता पूर्व विधायक राजमति निषाद व उनके पुत्र अमरेंद्र निषाद को तोड़ने के बाद समाजवादी पार्टी के दो और क्षत्रपों को बीजेपी तोड़ सकती है। भाजपा इन दोनों नेताओं की नाराजगी का एक बार फिर फायदा उठाने की फिराक में है। चर्चा है कि दोनों दिग्गजों से बीजेपी के बड़े नेताओं की बातचीत भी हो चुकी है।
महागठबंधन में सीटों के बंटवारे के बाद समाजवादी पार्टी के हिस्से में सबसे कम सीटें गोरखपुर-बस्ती मंडल में आई हैं। दोनों मंडलों की नौ सीटों में जहां समाजवादी पार्टी के हिस्से में तीन सीटें आई हैं तो बहुजन समाज पार्टी के पास छह सीटें हैं। जो सीटें बसपा के खाते में गई हैं वहां से सपा खेमे में काफी नाराजगी दिख रही है। कई नेताओं की तो सार्वजनिक नाराजगी तक सामने आ चुकी है।
संतकबीरनगर लोकसभा क्षेत्र से सपा के दिग्गज पूर्व सांसद भालचंद यादव के तो मंच पर ही आंसू निकल आए थे। टिकट न मिलने से आहत भालचंद यादव के बारे में चर्चा है कि वह बगावती झंड़ा बुलंद कर सकते हैं। भालचंद यादव समाजवादी पार्टी और बसपा दोनों दलों में रह चुके हैं। उनको यकीन था कि संतकबीरनगर से सपा उनको ही टिकट देगी लेकिन समझौता में सीट चले जाने के वजह से उनको निराशा हाथ लगी है।
इसी तरह बस्ती लोकसभा क्षेत्र के सपा के दिग्गज पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह टिकट को लेकर आश्वस्त थे। बीते लोकसभा चुनाव में पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह के भाई बृजकिशोर सिंह उर्फ डिंपल दूसरे नंबर पर रहे थे। विधानसभा चुनाव हारने के बाद राजकिशोर सिंह खुद ताल ठोकने की मूड में थे। काफी दिनों से वह तैयारियां भी शुरू कर दिए थे। लेकिन यह सीट भी समझौते के तहत बसपा के खाते में चली गई है। पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह भी सपा से थोड़ी दूरी बनाते हुए नई रणनीति बना रहे हैं।
माना जा रहा है कि गोरखपुर में पूर्व मंत्री जमुना निषाद के परिवार की तरह बीजेपी इन दोनों क्षत्रपों पर भी डोरे डाल सकती है। सूत्रों की मानें तो इन दोनों नेताओं की पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ भी बातचीत हो चुकी है। हालांकि, यह तय नहीं है कि दोनों नेता बीजेपी में शामिल होंगे या नहीं। वजह यह कि दोनों सीटों पर बीजेपी 2014 में चुनाव जीती थी। बस्ती से युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हरीश द्विवेदी सांसद हैं तो संतकबीरनगर से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति त्रिपाठी के पुत्र व पिछले दिनों जूता कांड से चर्चा में आए शरद त्रिपाठी सांसद हैं।
बहरहाल, चुनाव नजदीक आते ही दलों के प्रति आस्था बदलने का दौर जारी है। बीजेपी अभी सपा-बसपा के बड़े दिग्गजों पर नजर बिठाए हुए है, परंतु अपने सांसदों का टिकट काटकर दूसरे दलों के नेताओं को सिर आंखों पर बिठाना बीजेपी के लिए भी भारी पड़ सकता है।