नजमुल होदा की रिपोर्ट
संतकबीरनगर. यूं तो यूपी सरकार शिक्षा में सुधार के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और उसका नतीजा भी देखने को मिल रहा है। लेकिन योगी सरकार की शिक्षा में सुधार की मंशा पर विभाग ही पानी फेरने में लगा हुआ है। शिक्षा विभाग की मिलीभगत से जिले में ऐसे परिषदीय विद्यालय चल रहे हैं। जहां पढ़ने वाले एक भी छात्र स्कूल पर मौजूद नहीं हैं। लेकिन हैरत की बात ये हैं कि इस सरकारी स्कूल पर चार अध्यापकों की नियुक्ति है। सभी मुफ्त की सैलरी उठाकर मालामाल हो रहे हैं।
जी हां खलीलाबाद के बिधियानी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में एक हेड मास्टर और तीन सहायक अध्यापकों की तैनाती है। एक अध्यापक की सैलरी 60 हज़ार रुपये है। यानी महीने के दो लाख 40 हज़ार रूपये यूपी सरकार इस विद्यालय पर खर्च कर रही है। लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह है यहां पर एक भी छात्र मौजूद नहीं है। अध्यापक मुफ्त की सैलरी उठाकर मालामाल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो इस विद्यालय पर छात्र ना होने की वजह से सरकार का पैसा बर्बाद होता है और यहां पर दो अध्यापक को छोड़कर, बाकी दो अध्यापक हमेशा छुट्टी पर रहते हैं।
पत्रिका टीम ने जब इस विद्यालय में पड़ताल की तो एक छात्र बैठा हुआ मिला। जिसकी दिमागी हालत भी ठीक नहीं। ऐसे में सोचिये जिस विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे ना हो, और वहां पर आखिरकार अध्यापकों का क्या काम है। सिर्फ वेतन के नाम पर सरकार 28 लाख रुपये से ज़्यादा का बजट इस स्कूल पर खर्च कर रही है। विद्यालय में तैनात रसोइए से जब पत्रिका टीम ने बात किया तो उसका कहना था कि कि, इस विद्यालय को बने लगभग सात से आठ साल हो गये। यहां पर छात्रों की उपस्थिति ऐसे ही चली आ रही है।
प्रभारी बीएसए ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है। लेकिन ऐसे में एक सवाल ये भी खड़ा होता है कि क्या ऐसे विद्यालय जो शहर में मौजूद हों और विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक ना हो। यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही है।
वहीं अस्थानीय लोगों की मानें तो खलीलाबाद में ऐसे कई विद्यालय हैं जहां पर छात्रों के नामांकन बिल्कुल शून्य है लेकिन वहां पर अध्यापक मुफ्त की सैलरी उठा रहे हैं जो जांच का विषय है फिलहाल अब देखने वाली बात होगी कि इस पूरे मामले पर शिक्षा विभाग या सरकार क्या कार्यवाही करती है ए देखने वाली बात होगी।