
2 days old baby dead body removed from the grave in satna
सतना। रामनगर सामुदायिक अस्पताल की एनआरसी में बाल्टी के पानी में डूबकर मासूम की मौत मामले में प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। मामले को दबाने के लिए प्रबंधन ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही परिजनों को शव सौंप दिया था। उसको परिजनों ने दफन भी कर दिया। जबकि अप्राकृतिक कारणों से मौत हुई थी। लिहाजा, पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य व प्रोटोकॉल के दायरे में था। जब पत्रिका में खबर प्रकाशित हुई तो रामनगर पुलिस व प्रशासन हरकत में आया। उसके बाद मासूम के शव को कब्र खोदकर निकाला गया और पीएम कराया।
बताया जाता है कि अस्पताल प्रबंधन की इस करतूत की सूचना पुलिस ने तहसीलदार प्रदीप तिवारी को दी। निवेदन किया कि मामले की जांच के लिए पीएम आवश्यक है। उसके बाद तहसीलदार पुलिस टीम के साथ सुहैला गांव पहुंचे। वहां परिजनों की सहमति ली गई और पंचनामा तैयार किया गया। उसके बाद मासूम के शव को निकाला गया और पीएम के लिए भेजा गया। हालांकि, डॉक्टर ने अभी मौत के कारण स्पष्ट नहीं किए हैं।
यह है मामला
रामनगर के सुहैला गांव निवासी रक्षा कोल (9 माह) को 28 मई को एनआरसी रामनगर में अति कुपोषण के कारण भर्ती किया गया था। गुरुवार-शुक्रवार दरम्यानी रात मां बच्ची को लेकर एनआरसी के बेड पर सो रही थी। इसी दौरान पास रखी बाल्टी में मासूम गिर गई, जब तक परिजन व स्टाफ देखते, मासूम की डूबने से मौत हो गई थी।
परिजनों से लिखवा लिया
मामले में एनआरसी प्रबंधन ने अपनी गर्दन बचाने के लिए परिजनों पर पूरा मामला डालने का प्रयास किया गया है। मासूम का पीएम न कराना पड़े, लिहाजा परिजनों से लिखवा लिया कि पीएम की जरूरत नहीं है। उसके बाद शव उन्हे सौंपकर कफन दफन करवा दिया। आरोप है कि परिजनों पर दबाव भी बनाया गया कि वे किसी को कुछ न बताएं।
दर्ज हो सकती है एफआइआर
मासूम की मौत अप्राकृतिक है। इसमें प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला सीधेतौर पर बनता है। लिहाजा विभागीय कार्रवाई होने के साथ-साथ पुलिस एफआइआर भी हो सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग एनआरसी कर्मचारियों को बचाने में लगा हुआ है।
एनआरसी में बच्चे की मौत की सूचना पुलिस की तरफ से मिली थी। शव को पीएम के निकाला गया है। जांच जारी है।
प्रदीप तिवारी, तहसीलदार, रामनगर
Published on:
02 Jun 2019 05:40 pm
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