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36 साल से विस्थापन का दंश भोग रहे राजाधिराज श्रीराम

सतना स्थित व्यंकटेश मंदिर में प्रभु श्रीराम काट रहे हैं विस्थापन का समय राजाधिराज मंदिर से विस्थापित हुए भगवान को आज तक नहीं मिला अपना भवन

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सतना। रीवा राज्य के देवराजनगर इलाके के इलाकेदार ठाकुरलाल शिवबक्स ने 1866 में देवरा (देवराजनगर) में राजाधिराज मंदिर की स्थापना की थी। तत्समय अपने क्षेत्र के सबसे बड़े मंदिरों में शामिल इस मंदिर में भगवान राम, लक्ष्मण तथा माता जानकी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। बाणसागर डैम बनने के बाद यह मंदिर जलाशय के डूब क्षेत्र में आने के कारण मंदिर से भगवान विस्थापित हो गए। इन प्रतिमाओं को सतना स्थित व्यंकटेश मंदिर में लाया गया, जो कि राजाधिराज मंदिर की शाखा का मंदिर है। इसके साथ ही इस मंदिर का तत्समय 1988 में इसका मुआवजा सवा दो करोड़ के लगभग बनाया गया। इस राशि को कलेक्टर कोष में जमा करा दिया गया। कालांतर में इस मुआवजे से नए मंदिर का निर्माण प्रारंभ किया गया लेकिन कतिपय विवाद की वजह से यह मंदिर पूरा नहीं हो पाया। इस पूरे क्षेत्र की जनता आज भी इसके पूरे होने का इंतजार कर रही है।

आज भी 40 फीट की गहराई में डूबा है मंदिर

राजाधिराज मंदिर बनवाने वाले देवराजनगर इलाकेदार ठाकुरलाल शिवबक्स के वंशज कृष्ण प्रताप सिंह बताते हैं कि मूल देवराजनगर सोन नदी के बगल से बसा हुआ था। सोन नदी के किनारे राजाधिराज मंदिर हुआ करता था। तब यह सोन नदी के जलस्तर से लगभग 40 से 45 फीट ऊपर बना हुआ था। लेकिन डैम बनने के बाद अब यह मंदिर लगभग 35 फीट से ज्यादा नीचे पानी में समाया हुआ है। गर्मी के मौसम में कभी कभी जब जलाशय का स्तर अपने सबसे कम स्तर पर होता है तो मंदिर के गुंबद का कुछ हिस्सा नजर आता है।

92 में मूल मंदिर डूबा और 94 में नवनिर्माण शुरू

कृष्ण प्रताप बताते हैं कि इस मंदिर का मुआवजा वर्ष 1988 में लगभग सवा 2 करोड़ रुपए बना था। यह उस वक्त का किसी भवन के लिए बना सबसे ज्यादा मुआवजा था। जनभावना को देखते हुए इस मंदिर के खाली होने के बाद भी इसे क्षतिग्रस्त नहीं किया गया। वर्ष 1992 में बाणसागर जलाशय में मंदिर की धीरे धीरे समाधि हो गई। इसके बाद मंदिर के मुआवजे से न्यु देवराजनगर में आवंटित जमीन पर वर्ष 1994 में मंदिर का नव निर्माण प्रारंभ किया गया।

सोमपुरा ने तैयार की डिजाइन

इस मंदिर के निर्माण का टेंडर तत्समय में राजस्थान के मशहूर मंदिर निर्माता सोमपुरा को दिया गया। चंद्रकांत सोमपुरा ने इस मंदिर का डिजाइन तैयार किया और उन्ही के द्वारा इस मंदिर का निर्माण भी प्रारंभ किया गया। सोमपुरा ने ही अयोध्या में रामलला मंदिर का डिजाइन तैयार किया है। लेकिन बाद में इस मंदिर के महंत ने जब कलेक्टर कोष में जमा कराई गई सवा दो करोड़ रुपए की राशि के ब्याज का ब्यौरा चाहा तो इसकी जानकारी पर चुप्पी साध ली गई। इसके बाद विवाद की स्थिति बनी और मंदिर का निर्माण कार्य रोक दिया गया। हालांकि इस अवधि तक मंदिर का डोम छोड़ कर लगभग निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

क्षेत्र को आज भी अपने प्रभु राम का इंतजार

राजाधिराज मंदिर इस क्षेत्र का प्रमुख मंदिर था। सैकड़ों गांवों की आस्था का केन्द्र था। लिहाजा आज भी इस क्षेत्र की जनता को इस मंदिर के निर्माण कार्य के पूरा होने और प्रभु श्री राम के अपने स्वयं के मंदिर में स्थापित होने का इंतजार है। हाल ही में यहां पहुंचे उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने इस मंदिर का निर्माण शीघ्र प्रारंभ करने की घोषणा की है। यहां व्यापारी वर्ग के प्रमुख सूरज गुप्ता ने बताया कि कई बार इस संबंध में प्रशासन के पास आवेदन दिया गया है। लेकिन प्रशासनिक रुचि के आभाव में मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहा है।

"यह मामला संज्ञान में नहीं था। जैसा की बताया है तो जल्द ही इस मंदिर के निर्माण की वस्तुस्थिति की जानकारी ली जाएगी। मंदिर निर्माण के शेष कार्य और शेष राशि की जानकारी ली जाकर मंदिर निर्माण की दिशा में पहल की जाएगी।" -रानी बाटड, कलेक्टरमैहर