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Satna में Gujarati समाज का 65 साल पुराना इतिहास, शहर को दी व्यावसायिक पहचान, गुजराती संस्कृति से बढ़ाया भाईचारा

1956 में पहले गुजरात के भुज-कच्छ से आए थे सात परिवार, धीरे-धीरे बढ़ा दायरा, आज बड़ा समुदाय  

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GARBA ---गरबा बिट्स पर सीखे बेसिक सीखे स्टेप्स

GARBA ---गरबा बिट्स पर सीखे बेसिक सीखे स्टेप्स

सतना। किसी भी सभ्यता को रंग-रूप-पहचान देने में समाज का योगदान सर्वाधिक होता है। समाज ही सभ्यता और शहर को संवारता-आगे बढ़ाता है जिसकी छाप देश-दुनिया पर पड़ती है। सतना शहर को भी पहचान देने में कई समाजों का योगदान रहा है। आज हम बात कर रहे हैं गुजराती समाज की। शहर को व्यापारिक पहचान देने का श्रेय भी गुजराती समाज को जाता है।

गुजरात के कच्छ से गुजराती समाज के लोग सतना पहुंचे और इसे अपनी कर्मभूमि बनाने का निर्णय लेने के साथ व्यापार धंधों की शुरुआत की। शहर में 1956 में गुजराती समाज के जहां गिनती के 7 परिवार थे वहीं आज सैकड़ों परिवाराें की बसाहट सतना में हो चुकी है। गुजराती समाज का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। कोविड काल में भी समाज के लोगों ने बढ़चढ़कर अपनी जिम्मेदारी संभाली। प्रवासियों के साथ-साथ जरुरतमंदों की हर तरह से मदत करने का प्रयास किया।

गुजरातियो ने शुरु किया गरबा
दरअसल नवरात्रि में जगह-जगह गरबा की धूम रहती है,जिसकी शुरुआत आज से 65 साल पहले 1956 में श्री सतना गुजराती समाज ने की थी। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं और बेटियों ने गरबा में डांडिया की शुरुआत की। इसके बाद गरबा का दायरा धीरे-धीरे शहर समेत जिले भर में बढ़ने लगा। गुजराती समाज आज भी पारंपरिक वेशभूषा पहनावे में गरबा का आयोजन कराता है। जिसमें सिर्फ परिवार के साथ पहुंचने वाले लोगो और लड़कियाें-महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जाती है।

दिवाली के दूसरे दिन वैस्तु वर्ष

श्री सतना गुजराती समाज के लोगों द्वारा साल में एक बार दीपावली के दूसरे दिन वैस्तु वर्ष कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जाता है। एक ही छत के नीचे समाज के सभी लोग एकत्रित होकर बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं। इसके साथ ही हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाज के लोगों को सम्मानित किया जाता है। इसके साथ ही समाज के द्वारा गुजरात से सतना शहर में बसने वाले परिवारों से संपर्क करने का प्रयास करते रहते है।

सब मिलकर मनाते हैं पर्व
हमारा छोटा समाज है इसलिए पारिवारिक पृष्ठ भूमि है। छोटे-छोटे कार्यक्रम सभी एक साथ मिलकर मनाते है। 1956 में गुजराती समाज के कुछ परिवार सतना आए और इसी शहर में अपना काम धंधा शुरु किया।
कमलेश पटेल, अध्यक्ष, श्री सतना गुजराती समाज

गरबे से संवारी संस्कृति
शहर में गरबा की शुरुआत करने वाला समाज गुजराती समाज ही है। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य लोगों ने भी गरबा करना शुरु किया। गुजराती समाज का गरबा पारंपरिक वेशभूषा में आज भी होता है।
संजय शाह, सचिव, श्री सतना गुजराती समाज

धूमधाम से मनाते हैं उत्सव
हमारा समाज सभी को साथ लेकर चलने का काम कर रहा है। नवरात्रि के नौ दिन और शरद पूर्णिमा का उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ घर-घर और सभी के साथ मिलकर मनाने की परंपरा चली आ रही है।
तरुण ठक्कर


बेटियों की शादियों में सहयोग
आर्थिक रुप से कमजोर परिवार की हर तरह से यथा संभव मदत करने का प्रयास गुजराती समाज के द्वारा किया जाता है। बेटियों की शादियों में भी समाज के द्वारा सहयोग किया जाता है।
राजेश मेहता


प्रतिभाओं को प्रोत्साहन
शिक्षा व नौकरी,पेशा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वालों को समाज के द्वारा सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। वैस्तु वर्ष पर सम्मान कार्यक्रम का आयोजन होता है।
किशोर ठक्कर