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SATNA: शराब ठेके में पिछले साल से इस बार सरकार को 80 करोड़ का मुनाफा

अब अप्रैल से एकल समूह का होगा कब्जा  

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80 crore profit from last year in liquor contracts to the government

80 crore profit from last year in liquor contracts to the government

सतना. सरकार की नई शराब नीति सरकारी खजाने के लिये फायदेमंद साबित हुई है। सोमवार को हुए शराब ठेके में इस बार पिछले साल से 80 करोड़ ज्यादा में शराब दुकानों का ठेका उठा है। शराब का ठेका लेने में दो ही पार्टियां मैदान में थी और दोनों के बीच काफी देर तक मुकाबला चलता रहा। शुरुआत से ही 50-50 लाख की बोली बढ़ा रहे दोनों निविदाकारों में आखिरी में सोम ग्रुप ने भाठिया ग्रुप के सामने घुटने टेक दिये। इस तरह 290 करोड़ रुपये में पाण्डेय एसोसिएट के नाम से भाठिया ग्रुप ने बाजी मार जिले की शराब दुकानों में अपना कब्जा जमा लिया।
जिले की शराब दुकानों पर अब पाण्डेय एसोसिएट यानि भाटिया ग्रुप का कारोबारी कब्जा होगा। कई छोटे कारोबारी भी इस ग्रुप से जुड़ गए हैं। सोमवार को आबकारी की नई नीति के तहत बोली में शामिल हुए दो एकल समूहों ने बोली लगाते हुए 290.62 करोड़ रुपए में पाण्डेय एसोसिएट ने बाजी मार ली। जबकि दूसरा ग्रुप सोम कंपनी की ओर से रायसेन मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से बोली लगाने में सामने था। नीलामी प्रक्रिया कलेक्टर अजय कटेसरिया व जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार कुर्मी की मौजूदगी में हुई।

218 से बढ़कर 290 करोड़ का ठेका
जिले में अभी शराब की 71 दुकानें हैं। इनमें से 45 दुकानें देशी शराब की हैं और 26 दुकानें विदेशी शराब की हैं। इन दुकानों को अभी 25 समूह संभाल रहे हैं। जिले में पिछला ठेका लगभग 218 करोड़ का हुआ था। इस बार 290.62 करोड़ में पाण्डेय एसोसिएट को ठेका मिला है। नीलामी में 272 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइज रखा गया था। 273.12 करोड़ से बोली शुरू हुई और पहली बोली पाण्डेय एसोसिएट की ओर से भाटिया गु्रप ने लगाई। फिर 50-50 लाख की बोली बढ़ती गई। रायसेन मार्केट प्राइवेट लिमिटेड ने जब 290.12 करोड़ रुपए की बोली लगाई तो पाण्डेय एसोसिएट ने 50 लाख बढ़ाकर 290.62 करोड़ की बोली कर दी और अंत में एकल समूह पाण्डेय एसोसिएट को टेंडर दे दिया गया।

महंगा पड़ेगा शौक
आबकारी नीति में बदलाव के बाद यह तय हो चुका है कि शराब के शौकीनों को अब अपने इस शौक को पूरा करने के लिए पहले से कुछ अधिक रकम खर्च करनी होगी। नए वित्तीय वर्ष में शराब के दाम बढ़ने से शराब के शौकीनों की जेब पर कुछ अधिक भार पड़ेगा। नई नीति के तहत बढ़ी कीमतों में टेंडर होने से कीमतों में भी उछाल आएगा

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