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शैक्षणिक गुणवत्ता से उठेगा पर्दा

स्कूल शिक्षा विभाग ने ब्रिटेन की संस्था को दी सर्वे की जिम्मेदारी, गुणवत्ता सुधार योजना में कक्षा एक से 12वीं तक की शालाएं होंगी शामिल

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Satna Online

May 12, 2015

satna news

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विवेक मिश्र सतना


प्रदेश में गिरती शैक्षिक गुणवत्ता पर पर्दा नहीं रह सकेगा। गिरती शैक्षिक स्थिति से पर्दा उठाने की जिम्मेदारी मप्र स्कूल शिक्षा विभाग ने ब्रिटेन की संस्था को सौंपी है। ब्रिटेन की संस्था अब विंध्य में संचालित शालाओं की गुणवत्ता सुधारने की जोर आजमाइश करने आएगी। इस बाबत सोमवार को राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से आदेश भी जारी कर दिए गए।


विंध्य के जिलों का होगा सर्वे


शाला गुणवत्ता कार्यक्रम के तहत प्रदेश में ब्रिटेन के डिपॉर्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट एवं स्वयंसेवी संस्था ऑर्क के साथ एक पायलट योजना वर्ष 2012-13 में प्रदेश के तीन जिलों धार, सागर एवं भोपाल की 100 शालाओं में संचालित की गई। इसके बाद वर्ष 2014-15 में भोपाल संभाग के पांच जिलों की दो हजार प्राथमिक, माध्यमिक, हाई एवं हायर सेकेंडरी शालाओं का सर्वे किया गया। पायलट कार्यक्रम के तहत आए सफल परिणाम एवं क्रियान्वयन को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2015-16 के लिए ब्रिटेन की संस्था को भोपाल को छोड़कर प्रदेश के 46 जिलों के चयनित 52 विकासखंडों की 20 हजार शालाओं में सर्वे कार्य व सुधार कार्यक्रम संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह सर्वे कक्षा एक से 12वीं तक की शालाओं में संचालित होगा। ब्रिटेन की संस्था विंध्य के रीवा, सतना, सीधी व ङ्क्षसगरौली जिलों का सर्वे करने आएगी।


जिलास्तर पर नियुक्त होंगे आकलनकर्ता


शालाओं में आकलन कार्य के लिए जिलास्तर पर आकलनकर्ताओं की नियुक्ति की जाएगी। यह कार्य दो आकलनकर्ताओं के दल द्वारा (एक आंतरिक, एक बाह्य आकलनकर्ता) के रूप में जनशिक्षक (कक्षा एक से आठ) व ज्ञानपुंज (कक्षा नौ से 12) जो जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाए, सदस्यों का चयन किया जाएगा। जबकि बाह्य आकलनकर्ता के लिए शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त प्राचार्य, प्रधानाध्यापक अथवा व्याख्याता, उच्चश्रेणी शिक्षक का चयन किया जाएगा।


संभाग में ये शामिल


शाला गुणवत्ता सुधार व सर्वे के लिए रीवा संभाग से रीवा से मऊगंज, रायपुर कर्चुलियान, सतना से मझगवां, रामनगर, सीधी से सीधी, सिंगरौली से देवसर विकासखंड को शामिल किया गया है। ब्रिटेन की संस्था इन विकासखंड में चिह्नित जनशिक्षा केंद्रों व प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी शालाओं में दस्तक देगी।


ये हैं उद्देश्य


प्रदेश में

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कक्षा एक से 12 तक की शालाओं के गुणवत्ता आकलन के लिए सिस्टम डिजाइन करना।

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शाला की
गुणवत्ता आकलन की रूपरेखा तैयार करना जो विकास में उपकरण का कार्य करेगी।

इस उपकरण
के आधार पर शाला गुणवत्ता आकलन के मापदंड एवं बेंचमार्क सुनिश्चित करना।

शिक्षकों,
विद्यार्थियों, अधिकारियों को शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाते हेतु प्रोत्साहित करना एवं उनकी क्षमता सवंद्र्धन करना।

शालाओं
को अपने सुधार एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सुधार योजना बनाने में मार्गदर्शन करना।

प्रदेश में
एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना जो शालाओं के लिए गुणवत्ता आकलन हेतु एक इकाई के रूप में कार्य करे।


राज्य शिक्षा केंद्र आयुक्त की ओर से शाम को आदेश मिला है, जिसमें ब्रिटेन की संस्था द्वारा ङ्क्षवध्य की शालाओं की शैक्षिक गुणवत्ता पर सर्वे और सुधार करने का उल्लेख किया गया है।


अंजनी त्रिपाठी, प्राचार्य, जिला प्रशिक्षण संस्थान (डाइट)


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