24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मणिकर्णिका घाट तोड़े जाने पर भड़के पप्पू यादव, कहा- महमूद गजनवी के असली अनुयायी मोदी…

मणिकर्णिका घाट के रीडेवलपमेंट के लिए चल रहे तोड़फोड़ के काम से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बाद, बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बनारस के मणिकर्णिका घाट पर यह विध्वंस महमूद गजनवी के असली अनुयायी मोदी ने किया है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

पटना

•

image

Anand Shekhar

•

Updated: 16 Jan 2026, 2:03 PM IST

मणिकर्णिका घाट

मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ से भड़के पप्पू यादव (फोटो - X@Pappu yadav)

वाराणसी के मुख्य श्मशान घाट मणिकर्णिका घाट पर चल रहे रीडेवलपमेंट के काम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने पीएम मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए घाट पर हुई तोड़फोड़ को हिंदू सभ्यता पर हमला बताया है। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को महमूद गजनवी का अनुयायी तक कह दिया।

क्या कहा पप्पू यादव ने ?

पप्पू यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, “बनारस के मणिकर्णिका घाट पर यह विध्वंस महमूद गजनवी के असली अनुयायी मोदी ने किया। बनारस का गौरव उसके प्राचीन मंदिर हैं, जिन पर बुलडोजर बाबर नहीं मोदी चला रहे हैं। हर हर महादेव को बदल घर घर मोदी का नारा देने वाला हिंदू सभ्यता का सबसे बड़ा दुश्मन है। अंधभक्तों, आंख खोलो और सच देखो।”

पप्पू यादव के पोस्ट से सोशल मीडिया यूजर्स भड़क गए। उन्होंने उनके बयान का विरोध करते हुए कई कमेंट्स किए। जितेंद्र नाम के एक यूजर ने लिखा, "क्या आप अपना पुश्तैनी घर ऐसी हालत में छोड़ देते हैं? या तो नया बनाया जाता है या पुराने का रेनोवेशन किया जाता है।" पूर्णिया इंडेक्स नाम के एक पेज ने कमेंट किया, "आपको पूर्णिया को छोड़कर पूरी दुनिया की चिंता है।" कई अन्य लोगों ने भी इसी तरह के कमेंट्स किए।

क्या है असली मामला?

दरअसल, मणिकर्णिका घाट पर 25 करोड़ रुपये का रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट चल रहा है। इस प्रोजेक्ट की आधारशिला पीएम मोदी ने 2023 में रखी थी। बाढ़ और पानी के बढ़ते स्तर के कारण डेढ़ साल तक काम रुका रहा, लेकिन अब इसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में, घाट के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया है, और मलबा बड़ी नावों से गंगा नदी के पार ले जाया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, यह तोड़फोड़ "अवैध या सांस्कृतिक विनाश" नहीं है, बल्कि एक डिजाइन-आधारित पुनर्निर्माण है, जिसके तहत संरचनाओं का रेनोवेशन किया जा रहा है।

1771 में हुआ था मणिकर्णिका घाट का निर्माण

मणिकर्णिका घाट को वाराणसी के 84 घाटों में सबसे प्रमुख माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से, यह लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनवाए गए पांच घाटों में से एक है। उन्होंने इसे 1771 में बनवाया था और 1791 में इसका रिनोवेशन करवाया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस जगह पर भगवान विष्णु का "मणि" (रत्न) गिरा था, इसलिए इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा।

बड़ी खबरें

View All

पटना

बिहार न्यूज़

ट्रेंडिंग