
ADJ Court big judgement Against of satna nagar nigam
सतना। नगर निगम शहर की सड़कों से आवारा मवेशियों और कुत्तों को हटाए। पकड़कर कांजी हाउस में बंद करें और मालिकों पर अर्थदंड लगाए। यह आदेश एडीजे डीएन शुक्ला की कोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए शनिवार को दिया है। याचिका अधिवक्ता राजीव खरे ने लोकोपयोगी कोर्ट में लगाई थी। बताया गया कि, अधिवक्ता राजीव खरे ने 25 फरवरी 2017 को कोर्ट में याचिका लगाई थी।
इसमें सड़क से आवारा मवेशियों व कुत्तों को हटाने की मांग की थी। कहा था कि, ये निगम की जिम्मेदारी है। उसका निर्वहन नहीं करने से सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। रहवासी कुत्तों के काटने से लोग घायल हो रहे हैं। बावजूद जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं। याचिका की सुनवाई कर शनिवार को कोर्ट ने निगम को आदेश दिए।
आरटीआई की जानकारी का जिक्र
याचिकाकर्ता आरटीआइ एक्टिविस्ट हैं। उन्होंने जानकारी निकाली थी कि हर साल कितने मामले कुत्तों के काटने के आते हैं। निगम ने कांजी हाउस कितने मवेशी भेजे। कितने सड़क हादसे मवेशियों के कारण हुए और संबंधित विभागों ने जो जवाब प्रस्तुत किया था। उसे भी याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया था। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने आरटीआइ के तथ्यों का भी उल्लेख किया है।
एक पक्षीय फैसला
मामले में याचिकाकर्ता ने कलेक्टर, निगमायुक्त, महापौर सहित आधा दर्जन को पक्षकार बनाया था। शुरुआत में निगमायुक्त व महापौर के अधिवक्ता उपस्थित हुए। लेकिन, उसके बाद उन्होंने निगम का पक्ष नहीं रखा। कलेक्टर का प्रतिनिधि भी उपस्थित नहीं हुआ। लगातार ऐसा होने पर याचिकाकर्ता ने गत सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा कि जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। कोर्ट ने पक्षकारों को उपस्थित होकर पक्ष रखने को कहा। बावजूद कोई उपस्थित नहीं हुआ। लिहाजा एक पक्षीय फैसला सुनाया।
क्या है शहर से लेकर गांव तक की स्थिति
बता दें कि, शहर से लेकर गांव तक की सड़कों में मवेशियों का राज है। किसी भी सड़क पर चलना वाहन चालकों के लिए किसी मुशीबत से कम नहीं है। आए दिन रात में वाहन चालक मवेशियों से भिड़कर सड़क हादसे का शिकार होते है। फिर मवेशियों के मालिक हादसे के बाद सामने आते है। जिससे आए दिन वाद-विवाद की स्थितियां बनती है।
Published on:
9 Sep 2018, 3:52 PM IST
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