
Ajaygarh civil judge Manoj Soni got Anticipatory bail in Rape case
जबलपुर. पन्ना. छतरपुर. मप्र हाईकोर्ट ने रीवा जिले की महिला शासकीयकर्मी की याचिका पर पन्ना जिले के अजयगढ़ में कार्यरत सिविल जज मनोज सोनी के विवाह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह निजी मामला है। कोर्ट ने कहा कि सोनी के खिलाफ दर्ज एफआइआर पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस स्वतंत्र है। लेकिन, कोई भी कार्रवाई जजेस प्रोटेक्शन एक्ट के प्रावधानों व सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए की जाए। वहीं एक अन्य याचिका में दुष्कर्म के आरोपित सिविल जज मनोज सोनी को अग्रिम जमानत मिल गई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना अमिताभ मिश्रा की अदालत ने सोमवार को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 के तहत सोनी की अर्जी पर अग्रिम जमानत का लाभ देने के निर्देश दिए।
दोनों परिवारों में मायूसी
छतरपुर में मनोज सोनी की सोमवार को होने वाली शादी स्थगित हो गई है। ज्यादती के आरोप के बाद दोनों परिवारों ने बातचीत कर फिलहाल शादी टाल दी। उनके नजदीकी रिश्तेदारों ने इसकी पुष्टि की। सोनी परिवार की ओर से रिश्तेदारों को दो दिन पहले फोन कर इसकी सूचना दी गई थी। शादी छतरपुर के पन्ना रोड स्थित होटल में होनी थी। सोमवार को दोनों परिवारों में मायूसी छाई रही। छतरपुर स्थित जज मनोज सोनी के घर के दरवाजे दिनभर बंद रहे। वहीं महोबा निवासी लडक़ी के भाई ने पत्रिका को फोन पर बताया कि मनोज सोनी पर मामला दर्ज होने के बाद शादी की खुशी खत्म सी हो गई थी, इसलिए दोनों परिवारों ने मिलकर शादी की तारीख टाल दी। उन्होंने कहा कि अब शादी करनी है या नहीं, यह हमारे परिवार का मामला है, लेकिन आरोप लगाने वाली महिला और जज साहब के विवाद में हमारे परिवार को परेशान होना पड़ रहा है।
यह है मामला
रीवा जिले में कार्यरत महिला शासकीयकर्मी ने याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि पन्ना जिले के अजयगढ़ में कार्यरत सिविल जज मनोज सोनी ने सजातीय होने के नाते विवाह का झांसा देकर लगातार उससे दुष्कर्म किया। इसके बाद 50 लाख रुपए दहेज की मांग करते हुए उसने वायदे से पल्ला झाड़ लिया। याचिका में कहा गया था कि उसे धोखा देकर जज सोनी दूसरी जगह विवाह करने जा रहे हैं। याचिका में मांग की गई कि आरोपित जज के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जाए और उसका विवाह रोका जाए। सरकार की ओर से बताया गया कि याचिका दायर होने के बाद अजयगढ़ थाने में जज सोनी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली गई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए कहा कि सुको के दिशा-निर्देशों के तहत न्यायिक अधिकारी के पदीय कर्तव्य के दौरान लगाए गए आरोपों पर कार्रवाई के लिए सुको ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जजेस प्रोटेक्शन एक्ट में भी इसके लिए प्रावधान हैं।
Published on:
19 Jun 2018 02:24 pm
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