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नेशनल हाईवे पर आधी रात को बैंक में वारदात

सितपुरा की मध्यांचल बैंक के टूटे ताले, सर्वर के साथ सीसीटीवी डीवीआर ले गए चोर, आईटी एक्सपर्ट हो सकता है मास्टरमाइंड

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Bank attack at midnight on National Highway

Bank attack at midnight on National Highway

सतना. नागौद थाना क्षेत्र के सितपुरा गांव में स्थित मध्यांचल ग्रामीण बैंक में शनिवार और रविवार की रात चोरी हो गई। बदमाशों ने यहां नकदी पर हाथ साफ करने की बजाए सामान चोरी किया है। जिस तरह यहां चोरी हुई है उससे लग रहा है कि चोरों का मकसद रुपए चुराना नहीं था, बल्कि ग्राहक और बैंक का पूरा डाटा हासिल करना असली मकसद था। इस लिहाज से उम्मीद यह है कि इस घटना के पीछे का मास्टरमाइंड कोई आईटी एक्सपर्ट हो सकता है। अगर वास्तव में इस घटना के पीछे आईटी एक्सपर्ट है तो फिर ग्राहकों के साथ बैंक को बड़ी क्षति पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हरकत में आई पुलिस
सूत्रों के मुताबिक, चोरी के तरीके को देखते हुए एसपी रियाज इकबाल ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए विशेष टीम लगा दी है। बैंक अधिकारियों से भी जरूरी जानकारी ली जा रही है। फिलहाल पुलिस का साइबर सेल अपने तरीके से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। साइबर सेल, एफएसएल, फिंगरप्रिंट और डॉग स्क्वायड की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। नागौद एसडीओपी रवि शंकर पाण्डेय और नागौद टीआइ मनोज सोनी भी अपने स्तर से जांच कर रहे हैं।
डकैती के बाद से हाइवे पर ब्रांच
मध्यांचल ग्रामीण बैंक की यह शाखा नेशनल हाईवे- 75 पर सतना और नागौद के बीच सितपुरा में बस स्टैंड के पास है। इसका संचालन किराए के भवन में हो रहा है। यह भवन सितपुरा निवासी सुरेंद्र सिंह का बताया जाता है। स्थानीय जानकारों के अनुसार बैंक की यह ब्रांच पहले सितपुरा कुलगढ़ी मार्ग पर अमदरी गांव में थी। यह मार्ग अक्सर सूना रहता था जिसका फायदा उठाकर यहां डकैती की वारदात को दिनदहाड़े अंजाम दिया गया था। लगभग 15 वर्ष पहले जब यह घटना हुई थी तभी इस बैंक को मुख्य मार्ग में शिफ्ट किया गया था। तब से ही यह ब्रांच एनएच 75 के किनारे है।
दो बार पहले हुआ चोरी का प्रयास
सितपुरा के लोग बताते हैं कि मध्यांचल ग्रामीण बैंक की इस शाखा में वर्ष 2014 -15 एवं 2016 में भी चोरी का प्रयास हो चुका है। उन घटनाओं के आरोपी पकड़े नहीं गए हैं। यही वजह है कि अब सवाल हो रहा है कि इस ताजा घटना के पीछे भी कहीं उन्हीं बदमाशों का हाथ तो नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इस बार बदमाशों ने शटर और चैनल गेट के ताले तोड़े और स्ट्रांग रूम तक पहुंच गए। स्ट्रांग रूम का ताला तोड़कर कैश पेटी का ताला तोडऩे का प्रयास किया गया लेकिन ताला नहीं टूटा जिससे नगदी सुरक्षित है।
तीन लोगों का है स्टाफ
मालूम हुआ है कि इस ब्रांच में मैनेजर शंकर द्विवेदी, केशियर उमाशंकर कुमार एवं राजीव गुप्ता हैं। मैनेजर एवं केशियर करीब एक वर्ष से यहां हैं जबकि राजीव गुप्ता को चार- पांच साल हो गए हैं। राजीव पहले इसी ब्रांच में थे बाद में उनका तबादला हो गया था अब फिर से वह इसी ब्रांच में हैं।
निशाने पर नहीं था रुपया
बदमाश इस ब्रांच से नकदी नहीं ले गए हैं। लिहाजा सवाल होता है कि उनका मकसद क्या था? उन्होंने इतना रिस्क आखिर क्यों लिया? वारदात होने की जानकारी सबसे पहले स्थानीय लोगों को लगी। बैंक की शटर और गेट को खुला देखा तो उन्होंने शंका होने पर भवन स्वामी सुरेंद्र सिंह को सूचित किया। जिसके बाद बैंक और पुलिस अधिकारियों को जानकारी मिली। बैंक के लोगों ने घटना स्थल देखने के बाद पुलिस को बताया कि चार-पांच सेट कम्प्यूटर, बैंक का सर्वर, एक कूलर, एक पंखा सहित राउटर, यूपीएस, 8 बैटरी एवं अन्य सामान गायब है। इस ब्रांच से नकदी की बजाए कम्प्यूटर सिस्टम एवं सर्वर गायब हुआ है। सर्वर वह चीज है जिसमें ग्राहक और बैंक से संबंधित पूरी छोटी बड़ी जानकारी होती है। इसलिए यह संभावना है कि इस चोरी के पीछे किसी आईटी एक्सपर्ट का दिमाग हो सकता है जिसका मकसद छोटा नहीं बड़ा हाथ मारना हो सकता है।
सोची-समझी साजिश
ब्रांच में सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन बदमाश उन्हें भी रिकॉर्डिंग सिस्टम सहित निकाल ले गए हैं। इससे ऐसा लगता है कि बदमाशों ने बड़ी सोची-समझी साजिश के तहत वारदात को अंजाम दिया है। मुमकिन है कि वह जान बूझकर कूलर और पंखा ले गए हैं ताकि इस चोरी के पीछे डाटा की चोरी या सर्वर में सेंध लगाने का असली मकसद स्पष्ट तौर पर न दिखाई दे। दूसरे शब्दों में कहें तो पुलिस को गुमराह करने के लिए कूलर, पंखा भी चोरी किए गए ताकि पुलिस को लगे कि मामूली चोर हैं।