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Jan Man MP: 40 साल बाद भी रोजी-रोटी के लाले, रोजगार के लिए मुंबई-सूरत का रुख

हालात: रोजगार के लिए मुम्बई-सूरत का रुख, विस्थापन के दर्द में दब गया 'विकास'

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bansagar dam: bansagar bandh ke visthapito ki kahani

bansagar dam: bansagar bandh ke visthapito ki kahani

सतना। दोपहर के 1 बजे हैं। जिला मुख्यालय से करीब 95 किमी. का सफर तय कर अमरपाटन विस क्षेत्र के मझिगवां (रामनगर) गांव पहुंचा तो कुछ लोग रास्ते में ही खड़े मिले। उनको देखकर मैं भी ठहर गया। सड़क और बस्ती देखकर महसूस हुआ कि गांव विकसित है। वहां मौजूद ग्रामीणों से विकास के बारे पूछा तो 72 वर्षीय श्याम सुंदर शुक्ला ने कहा, 2004 में उन्हें पैतृक घर से विस्थापित करते हुए रामनगर में बसाया गया था। बाणसागर परियोजना के चौथे चरण में प्रभावित हुए थे।

तब से उनका पूरा परिवार रोजी-रोटी के लिए भटक रहा है। घर के सभी युवा गुजरात व मुम्बई में हैं। केवल महिलाएं व बच्चे घर पर हैं। ये जो घर बना है वह मुआवजे में मिले पैसे से खड़ा किया है। वे अपना अतीत याद करते हुए कहते हैं, हमारे पास 10 एकड़ जमीन थी। पूरा परिवार एक जगह रहता था।

सैकड़ों परिवारों की कुछ ऐसी ही कहानी

विस्थापन के पैसे से नई गृहस्थी स्थापित तो कर ली पर उसके बाद से भटक रहे हैं। विस्थापन का दर्द अकेले श्यामसुंदर के परिवार का नहीं। रामनगर में सैकड़ों परिवारों की कुछ ऐसी ही कहानी है। उनकी नजर में बाणसागर श्राप से कम नहीं। वे सीधे तौर पर कहते हैं कि ये परियोजना औरों के समृद्धि व विकास के लिए होगी, हम लोगों के लिए श्राप है। कई परिवार ऐसे हैं, जिन्हें रात में भूखे पेट सोना पड़ता है।

आधारशिला 14 मई 1978 में

बाणसागर परियोजना की आधारशिला सोन नदी पर शहडोल जिले के देवलोंद में 14 मई 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने रखी थी। बाद में 25 सितंबर 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा देश को समर्पित कर दिया गया। बांध में लगने वाली लागत मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार राज्यों ने मिलकर लगाई थी। भू-अधिग्रहण में शहडोल और सतना, उमरिया, कटनी जिला मुख्य रूप से प्रभावित हुआ था। 336 गांव डूबे गए थे।

80 से 90 हजार एकड़ का रकबा शामिल

इसमें अकेले रामनगर के 70 से 80 गांव का 80 से 90 हजार एकड़ का रकबा शामिल था। हिनौता निवासी नरेंद्र मिश्रा कहते हैं, विस्थापन के वक्त शासन ने कहा था कि विस्थापितों के हर घर से एक-एक नौकरी दी जाएगी, जो आज तक नहीं दी गई। मुआवजा मिलने के बाद सब लोगों ने पूरी लागत घर बनाने में लगा दी। देखने में तो सब समृद्ध लगते हैं लेकिन घर का खजाना पूरी तरह खाली है। रोजगार के लिए युवाओं को बाहर के शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। बेरोजगारी यहां का मुख्य मुददा है।

प्रथम चरण में मुआवजा की राशि 5 से 7 हजार

प्रभावित बताते हैं, प्रथम चरण में मुआवजा की राशि 5 से 7 हजार रुपए प्रति एकड़ थी। दूसरे चरण में बढ़ाकर 15 से 20 हजार रुपए एकड़ कर दिया गया। तीसरे चरण में 25 से 30 हजार रुपए हुआ और चौथे चरण में 50 से 60 हजार रुपए एकड़ दी गई थी। विस्थापितों को शिफ्ट करते समय शासन-प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि सबको बिजली व पानी जीवनभर मुफ्त में मिलेगा। लेकिन कुछ साल बाद बंदिश लगा दी गई। आज मनमर्जी का बिल आता है। गर्मी में एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ता है।

विस्थापित गांव
-पहला चरण: पाठा, खमिरिया, बम्हौरी, बइकोना, झिन्ना, बेला-1, बरतोना, रिवारा, देवराजनगर।
-दूसरा चरण: खजुरी, हमझोरी, गुलवार, गुजारा, डागा, मडकरा, कंदवारी, बेला-2।
-तीसरा चरण: डागा, बरगाई डागा, पड़रिया, खजुरी, रामनगर, मड़करा, गुलवार मझटोलवा, डिगिहा, मरगौती, बेला-3।
-चौथा चरण: गंजास, मसमासी, झिरहा, कर्रा, गोविंदपुर, गौहानी, मझिगवां, नारायणपुर, पदमी, गंगा सागर, पिपरी।

इन जगहों पर किया गया शिफ्ट
1978 केे बाद रामनगर ब्लॉक के लोगों का क्रमश: न्यू रामनगर, न्यू देवराज नगर, न्यू जट्टहा, न्यू गुलवार, बिंदुनगर में खाली पड़ी राजस्व भूमि पर 40-90 और 50-90 का पट्टा देकर रहने की व्यवस्था शासन द्वारा बनाई गई थी।

एक नजर में बाणसागर बांध
-जलग्रहण क्षेत्र : 18648 किमी.
-बांध की उंचाई : 67 मीटर
-बांध की लम्बाई : 1020 मीटर
-बांध का प्रकार : ईंट/मिट्टी
-अधिप्लव क्षमता : 47,742 घन मीतर प्रति सेकंड
-जल संचय : 5.41 घन किमी.
-डूब क्षेत्रफल : 587.54 वर्ग किमी
-प्रभावित जनसंख्या : 250,000 लोग (54,686 परिवार)
-कितने गांव डूबे : 336
-आरंभ होने का वर्ष : 1978
-पूर्ण होने का वर्ष : 2006

ये हैं मतदाता
- 2,19,688 कुल मतदाता
- 115193 पुरुष
- 104494 महिला