
सतना. ऋतुराज वसंत के स्वागत में प्रकृति संवरने लगी है। धरती ने धानी चादर ओढ़ ली है। ठंड विदाई की बेला में खड़ी है। चटक धूप के बीच खेतों में खिले सरसों के पीले फूलों पर मंडराते भवंरे खुशियां लेकर आ रहे वसंत के गीत गुनगुना रहे है। गुलाबी ठंड के बीच सरसों के खेंत में वसंत पंचमी का उत्सव मनाती युवतियां।

सतना. ऋतुराज वसंत के स्वागत में प्रकृति संवरने लगी है। धरती ने धानी चादर ओढ़ ली है। ठंड विदाई की बेला में खड़ी है। चटक धूप के बीच खेतों में खिले सरसों के पीले फूलों पर मंडराते भवंरे खुशियां लेकर आ रहे वसंत के गीत गुनगुना रहे है। गुलाबी ठंड के बीच सरसों के खेंत में वसंत पंचमी का उत्सव मनाती युवतियां।

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