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आज की सबसे बड़ी खबर: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नाम पर सरकार कर रही हैं बड़ा फर्जीवाड़ा, यहाँ पढ़े पूरी खबर

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नाम पर जिलेभर में चल रहा फर्जीवाड़ा, जिला प्रशासन और सरकार जानकर भी अनजान, अभी तक नहीं हुई कार्रवाई

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beti bachao beti padhao scheme post office

beti bachao beti padhao scheme post office

सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले में सरकार को चुनौती देते हुए एक बड़ा गोरखधंधे का मामला सामने आया है। प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नाम पर दिन के उजाले में ठगा जा रहा है। फिर भी प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। ये खेल करीब एक हफ्ते से बदस्तूर जारी है। शहर की प्रिंटिंग प्रेस व स्टेशनरी में धड़ल्ले से योजना के लाभ लेने संबंधी फर्जी व अवैध फॉर्म बेचे जा रहे हैं। शहर के पन्नीलाल चौक व स्टेशन रोड के अलावा कस्बों में भी यह फॉर्म लोगों को ठगने के लिए उपलब्ध हैं। अभी तक इन दुकानों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

फॉर्म के दावे के अनुसार योजना के तहत आवेदक को 2 लाख रुपए दिए जाएंगे। पूरे जिले में चल रही इस तरह की धोखाधड़ी से प्रशासन अंजान बना हुआ है। इसके चलते सैकड़ों लोग रोजाना डाकघरों से महिला बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली फॉर्म भेज रहे हैं। यह हालत तब है जब मंत्रालय बकायदा नोटिफिकेशन जारी कर लोगों को इस धोखाधड़ी में न पडऩे की सलाह दे चुका है।

suresh mishra IMAGE CREDIT: patrika

मंत्रालय के नोटिफिकेशन से अंजान विभाग
लोगों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर जिला स्तर पर प्रचार-प्रसार का व्यापक अभियान चलाकर एेसी गतिविधियों को रोकने की बात कही है। लेकिन हैरत कि बात यह है कि विभाग के स्थानीय अधिकारियों को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। विभागीय अधिकारी सिर्फ वाट्सएप से मैसेज फॉरवर्ड कर सक्रियता दिखा रहे हैं। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि लोगों को जागरुक कर बताया जाए कि उनके फेक फॉर्म को मंत्रालय जला देगा। बताया गया कि योजना में दो लाख मिलने की बात यूपी से फैली जिसके बाद पंजाब, एमपी से होते हुए यह अफवाह कई राज्यों में फैल गई।

यह है सरकार की योजना
कई राज्यों से लाखों आवेदन पत्र का ढेर लगने के बाद महिला एवं बाल विकास केंद्रीय मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अंग्रेजी में नोटिफिकेशन डालते हुए साफ किया है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का उद्देश महिला व बालिका सशक्तिकरण से है न कि यह कोई बेनीफिसरी स्कीम है। यह डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर योजना नहीं है। मंत्रालय ने साफ किया है कि उसने इस योजना में बालिकाओं को दो लाख रुपए दिए जाने की कोई अधिसूचना जारी नहीं की बावजूद नकली व अवैध फॉर्म मंत्रालय भेजे जा रहे हैं।

जानकारी पर भारी लालच
फर्जीवाड़े व धोखाधड़ी से अंजान लोग डाकघरों में जाकर फॉर्म को स्पीड पोस्ट कर रहे हैं। जय स्तम्भ स्थित प्रधान डाकघर से बीते एक हफ्ते में करीब पांच सौ फॉर्म स्पीड पोस्ट किए गए हैं। गुरुवार को फॉर्म स्पीड करने डाकघर पहुंची कामना वर्मा ने बताया कि 10 रुपए का फॉर्म लिया है व 41 रुपए स्पीड पोस्ट में लगने है। यदि पचास रुपए खर्च कर भविष्य में दो लाख मिल जाएं तो क्या बुरा है। जब उसे बताया गया कि यह फेक फॉर्म है, कोई पैसे नहीं मिलने वाले तो उसने कहा कि हो सकता है कि यह झूठ हो लेकिन यदि सच निकला तो बाद में पछताना पड़ेगा। इसलिए पचास रुपए जाने का कोई गम नहीं। यही सोच यहां आने वाले हर आवेदक की रही। पोस्ट मास्टर नीरज कुमार ने बताया कि हम लोगों की पोस्ट लेने से मना नहीं कर सकते। यदि मना करते हैं तो लोग झगड़ा शुरू कर देते हैं।

आखिर मकसद क्या
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को बेनीफिट ट्रांसफर स्कीम बताकर अफवाह फैलाने के बाद थोक में डाकघरों से भेजे जाने वाले फॉर्म में आखिर फायदा किसका हो रहा है। देखने में संदिग्ध लग रहे फॉर्म मंगाने के पीछे मकसद क्या है? महिला बाल विकास के अधिकारी भी यह नहीं समझ पा रहे कि किस उद्देश्य के लिए अफवाह फैलाकर भोले-भाले लोगों को बेटियों के नाम पर मूर्खतापूर्ण बनाया जा रहा है। क्या सिर्फ पांच-दस रुपए का फॉर्म बेचने के लिए यह भ्रम पैदा किया गया या फिर इसका मकदस कुछ और है। यदि दो लाख दिलाने का दावा करने वाले फॉर्म पर नजर दौड़ाई जाए तो यह एकदम संदिग्ध नजर आता है। फॉर्म में आवेदकों के नाम, पते, आधार, मां का आधार, पिता का आधार, बैंक खाता, बैंक आईएफएससी कोड, मोबाइल नम्बर, ई-मेल जैसी पर्सनल सूचनाओं के आलावा सरपंच का प्रमाणीकरण मांगा जा रहा है। फॉर्म में रक्षा मंत्रालय व बाल विकास विभाग दिल्ली का संक्षिप्त पता भी दर्ज है। गौर करने वाली बात यह है कि फॉर्म में सरपंच की जगह प्रधान लिखा है जो इस ओर इशारा कर रहा है कि यूपी से इसकी नकल कर यहां छपाई की जा रही है।

विभाग की एेसी कोई योजना नहीं है। यह पूरी तरह फर्जीवाड़ा है। सभी परियोजना अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा गया है कि लोगों को जानकारी देकर ठगे जाने से आगाह करें।
मनीष सेठ, जिला कार्यक्रम अधिकारी

एेसी कोई योजना नहीं है कि फॉर्म भरने से दो लाख दिए जाएंगे। कोरी अफवाह पर लोग ध्यान न दें। फॉर्म बेचने वालोंं के यहां एसडीएम को जांच के लिए भेजा जाएगा।
मुकेश शुक्ला, कलेक्टर