
satna rashan
सतना. प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बेहतरी के तमाम दावे किए जा रहे हैं। पर उनकी जमीनी हकीकत इन दावों के ठीक विपरीत है। पात्रता के बाद भी परिवारों को खाद्यान्न नहीं मिल रहा है। यह खुलासा सरकार के आंकड़ों से ही हो रहा है। हाल ही में जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 9 माह में प्रदेश के 1,93,245 परिवारों को राशन नहीं मिला है। इससे राशन दुकानों में 3200 मीट्रिक टन खाद्यान्न शेष रह गया है। सीएम हेल्पलाइन में खाद्यान्न न मिलने की 2320 शिकायतें लंबित हंै। ये आंकड़े साबित कर रहे हैं कि या तो खाद्यान्न वितरण की पात्रता सूची में फर्जी नाम जुड़े हैं या फिर पात्र लोगों को खाद्यान्न नहीं मिल रहा है। हकीकत जो भी हो दोनों ही स्थिति में सरकार गरीबों को खाद्यान्न उपलब्ध करा पाने में असफल साबित हो रही है। सतना जिले की बात करें तो यहां ४३७६ परिवारों को खाद्यान्न नहीं मिला है। जिले से ५१ शिकायतें सीएम हेल्प लाइन में दर्ज की गई हैं।
9 माह से नहीं उठा रहे खाद्यान्न
प्रदेश स्तरीय अभियान में जांच के दौरान पाया गया कि पात्रता सूची में 2,86,326 अपात्र परिवारों के नाम जुड़े हुए हैं। लिहाजा इन परिवारों को पात्रता सूची से हटाया गया। इसके विपरीत 80,696 पात्र परिवारों के नाम जोड़े गए। लेकिन इस अभियान के बाद भी स्थिति यह बन रही कि काफी संख्या में पात्रता पर्ची जारी नहीं होने की शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में लंबित हैं। जो साबित कर रही हैं कि अभियान के बाद भी काफी संख्या में अपात्र परिवार अभी भी जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि 1.93 लाख परिवार 9 माह से अपना खाद्यान्न नहीं उठा रहे हैं। मामले में कलेक्टर मुकेश शुक्ला ने कहा, ऐसे परिवारों का परीक्षण कराया जा रहा है जो लगातार 9 माह से खाद्यान्न नहीं ले रहे हैं। अगर ये अस्तित्व में नहीं है या फिर अपात्र हैं तो इनके नाम काटे जाएंगे। सीएम हेल्प लाइन में मामलों के निराकरण के लिये संबंधित विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
सीएम समाधान के बाद खुली नींद
सात अगस्त को सीएम समाधान में मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्रता पर्ची जानी नहीं होने की शिकायतों के निराकरण का विषय लिए जाने के साथ ही विभाग की नींद टूट गई है। अब आनन-फानन राशन दुकानों में बचे खाद्यान्न और राशन न उठाने वाले परिवारों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। आंकड़ों से ही इस मामले में बड़ा घालमेल समझ आने पर अब विभाग मान रहा है कि जिन परिवारों ने लगातार ९ माह से खाद्यान्न नहीं उठाया वह या तो अस्तित्व में नहीं हैं या फिर अपात्र हैं। इसलिए इन अपात्र परिवारों के नाम हटा कर पात्र लोगों को खाद्यान्न वितरण का लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं।
यह है संभाग की स्थिति
सतना जिले में देखा जाए तो 4376 परिवारों ने 9 माह से खाद्यान्न नहीं उठाया है। यह स्थिति तब है जब यहां अभियान के बाद 4861 अपात्र परिवारों के नाम काट कर 202 पात्र परिवार के नाम जोड़े गए। इस स्थिति में 51 परिवारों द्वारा पात्रता पर्ची जारी नहीं होने की शिकायत सीएम हेल्प लाइन में की गई। रीवा की स्थिति देखे तो यहां अभियान के तहत 2812 अपात्र परिवार विलोपित किए गए और 1826 पात्र परिवार जोड़े गए। इसके बाद भी 9 माह से 1276 परिवार खाद्यान्न नहीं उठा रहे हैं। सीएम हेल्प लाइन में 48 शिकायतें लंबित हैं। सीधी में 2234 परिवार विलोपित किए गए तथा 67 परिवार जोड़े गए। इसके बाद भी 784 परिवार अपना राशन 9 माह से नहीं ले रहे हैं। यहां से 31 पात्र परिवारों की खाद्यान्न नहीं मिलने की शिकायत सीएम हेल्प लाइन में लंबित है। सिंगरौली की स्थिति देखें तो 1378 नाम कटने के बाद भी 1877 नाम खाद्यान्न नहीं ले रहे। जबकि 37 शिकायतें लंबित है।
अभी भी अपात्र शामिल
जानकारों का कहना है कि अभियान के तहत भले ही अपात्रों के नाम काटे गए हैं लेकिन मैदानी अमले ने पूरी ईमानदारी से काम नहीं किया है। लिहाजा अभी भी व्यापक पैमाने पर अपात्रों के नाम सूची में है। यही वजह है कि वे खाद्यान्न लेने नहीं आ रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि ये ऐसे परिवार हैं जो अस्तित्व में नहीं है लेकिन उनके नाम फर्जी तरीके से पात्रता सूची में दर्ज है।
Published on:
21 Jul 2018 10:13 am
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