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बिरला सीमेंट फैक्ट्री: श्रमिकों को समझाने में कंपनी प्रबंधन नाकाम, तनाव बरकरार

दूसरे दिन भी जारी रही ठेका श्रमिकों की हड़ताल

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birla cement plant satna madhya pradesh

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सतना। बिरला सीमेंट फैक्ट्री सतना में ठेका श्रमिकों की हड़ताल दूसरे दिन रविवार को भी जारी रही। ठेका श्रमिक काम पर नहीं लौटे। वे कंपनी परिसर में बैठ धरना देते नजर आए। इस दौरान दिनभर भाषणबाजी का दौर चला पर कंपनी प्रबंधन श्रमिकों को समझाने में असफल रहा। दरअसल, वेतन विसंगतियों को लेकर ठेका श्रमिक शनिवार को हड़ताल पर चले गए। सुबह 8 बजे के पाली में गए श्रमिक इसका समर्थन किए। उसके बाद प्रदर्शन बड़ा रूप लेता गया।

देखते ही देखते 500 से ज्यादा ठेका श्रमिक हड़ताल में शामिल हो गए। शुरुआती दौर में प्रबंधन के अधीनस्थ अधिकारी श्रमिकों को समझाने का प्रयास किए पर श्रमिक उनकी सुनने को तैयार नहीं थे।कारण था कि अधीनस्थ अधिकारी वेतन विसंगति पर किसी प्रकार का निर्णय नहीं ले सकता था। लिहाजा, अधिकारी को वापस लौटा दिया गया।

इसके चलते देर शाम तक प्रदर्शन जारी रहा। उसके बाद प्रबंधन की ओर से कोई नहीं आया। रविवार सुबह यही स्थिति बनी रही। बड़ी संख्या में श्रमिक कंपनी पहुंचे, लेकिन ड्यूटी कोई नहीं गया। इससे कंपनी का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित रहा। अगर, ये हड़ताल 5-6 दिन चलती है, तो प्रोडक्शन तक ठप हो जाएगा। फिलहाल स्थाई श्रमिकों के बल पर प्लांट को चलाने का प्रयास प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है।

श्रमिक सुनने को भी नहीं तैयार
श्रमिक प्रबंधन की सुनने को तैयार नहीं हैं। उनकी मांग है कि वेतनमान केंद्रीय कानून अनुसार बढ़ाया जाए। प्रबंधन कैटेगरीवाइज 5, 10, 15 व 20 रुपए की वृद्धिकर श्रमिकों को काम पर लौटने को बोल रहा है। इससे दोनों ओर से स्थिति विषम बनी हुई है। जितना काम प्रभावित होगा प्रबंधन पर दबाव बनेगा। वहीं श्रमिक संतोषजनक वृद्धि से पहले काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं।

श्रमिक संगठनों ने बनाई दूरी
पूरे आंदोलन से श्रमिक संगठन दूरी बनाए हुए हैं। कंपनी के रजिस्टर्ड व अन्य सभी प्रकार के श्रमिक संगठन आंदोलन का साथ नहीं दे रहे हैं। वे विरोध भी इसलिए नहीं कर रहे कि मामला श्रमिकों से जुड़ा है। उधर, श्रमिकों की मानें तो प्रबंधन बात नहीं मानता तो प्रदर्शन जारी रहेगा।श्रमिक चाहते हैं कि वाइस प्रेसीडेंट आएं और वेतनमान को लेकर बात करें। लेकिन, वे अभी तक नहीं आए हैं।

दो नेताओं का खेल
हड़ताल में दो नेताओं को खेल देखने को मिल रहा है। वे श्रमिकों को आगे करते हुए अपना हित साधना चाहते हैं। एक पटेल नेता हैं, जो अभी तक कंपनी के ठेका, खदान का काम अप्रत्यक्ष रूप से लेते रहे हैं। एक यादव नेता हैं, जो कंपनी के ट्रांसपोर्ट ठेका में कब्जा रखते हैं।