शनिवार दोपहर दो बजे के करीब जबलपुर से आ रही मालगाड़ी के इंजन में क्रमांक 14-बी फ्यूङ्क्षलग प्वाइंट से इंजन में डीजल भरते हुए कर्मचारी मिला। फ्यूलिंग के समय डीजल का अधिकांश हिस्सा ड्रम और ट्रैक पर गिरता हुआ पाया गया। कर्मचारी ने बताया कि इंजन के टैंक का मेंटीनेंस नहीं हुआ है, इसकी वजह से डीजल पूरी तरह से उसमें नहीं जा पा रहा है। ये कोई पहला वाकया नहीं है, एेसे ही कई मामले रोज देखने को मिलते हैं, जब फ्यूलिंग के दौरान इंजन के टैंक मंे कम ट्रैक पर डीजल बहाव के दृश्य ज्यादा देखने को मिलते हैं। विंध्य के प्रवेश द्वार सतना रेलवे स्टेशन से रोजाना 150 से अधिक सवारी ट्रेनों व मालगाड़ी का आवागमन होता है। अधिकांश ट्रेनों में यहां के डीजल डिपो से इंजनों में डीजल भरा जाता है। इंजन में डीजल भरते समय टैंक में कम बाहर रखे ड्रम या फिर ट्रैक पर अधिक बहाया जाता है। ट्रैक पर डीजल भर जाने से कई बार आग की घटनाओं की पुनरावृत्ति हो चुकी है। इसके बावजूद हजारों लीटर डीजल के ट्रैक पर जाने के बाबत स्थानीय मैकेनिकल विभाग आंख मूंदे हुए है।