
Bollywood touch ups in Durga statues of satna city
सतना. बड़ी-बड़ी आंखें, उस पर स्मोकी आईशेडो, लंबे घुंघराले कमर तक लटकते मल्टी कलर बाल, स्टाइलिश डिजाइनर वेलबेट साड़ी... आप सोच रहें होंगे कि हम किसी बॉलीवुड सेलिब्रेटी की बात कर रहे हैं। पर ऐसा नहीं है। हम बात कर रहे हैं मां अम्बे की। इस बार शहर के कई दुर्गा पंडालों में दुर्गा मां का एेसा ही स्वरूप देखने को मिलेगा। शहर के मूर्तिकारों ने कुछ नए इनोवेशन के साथ बॉलीवुड की तर्ज पर मां को स्वरूप दिया है। जिसे देखते ही मां जगत जननी के आप सभी दीवाने हो जाएंगे। नवरात्र को बस एक दिन शेष है। दुर्गा पंडालों की साज सज्जा अपने अंतिम दौर में है। साथ ही मूर्तिकार दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम और आधुनिक रूप भी दे रहे हैं। समय बहुत कम है, इसलिए प्रतिमाओं पर उनकी कुशल और सधी हुईं उंगलियां तेजी से चलने लगी हैं।
दिखेगा आधुनिकता का समावेश
मूर्तिकार मिट्टी और पुआल से रची जाने वाली इस प्राचीन कला के साथ कई प्रयोग किए हैं। बदलते युग की मांग को देखते हुए दुर्गा के साथ गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियों को आधुनिक स्वरूप में ढाल दिया है। सजावट, पहनवा, खड़े होने का स्टाइल, मेकअप यह सब आज के समय के अनुसार देखने को मिलेगा। मंगलवार को सुबह या देररात तक अलग-अलग प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप दे देंगे।
सजीव सी लगने लगीं मूर्तियां
मूर्तिकार रेशू दाहिया ने बताया कि मूर्तियों में रंग भरा जा चुका है। उनके नैन नक्शे को सुंदर रूप दिया जा रहा है। अब साडिय़ों, गहनों से सजाने में लगे हुए हैं ताकि उन्हें शहर के विभिन्न हिस्सों और यहां तक की शहर के बाहर के समय रहते भेजा जा सके। मूर्तिकारों ने बताया कि इस बार मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल होने वाले परंपरागत रंगों, मूर्तियों की सज्जा में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्रियों व मूर्ति की संरचना में काफी परिवर्तन भी लोगों को देखने को मिलेगा।
सिरेमिक मूर्तियों की मांग
मूर्तिकार पाल ने बताया कि इस वर्ष सिरेमिक मूर्तियों की भारी मांग है। ये मूर्तियां चमकीली होती हैं, जो रोशनी में चमक उठती हैं और मूर्ति को बहुत आकर्षक बनाती हैं। यह एक तरह का रंग है, जिसे हम मिट्टी के ऊपर लगाते हैं। मूर्ति निर्माण में अपने आधुनिक प्रयोगों के कारण गुमनामी के अंधेरों से निकलकर मूर्तिकार के रूप में प्रसिद्धि पाने वाले इन मूर्तिकारों ने इस वर्ष बॉलीवुड से प्रेरित मूर्तियां भी बनाई हैं।
बस अब बिक्री का इंतजार
मूर्तिकारों का कहना है कि दुर्गा उत्सव में दुर्गा मूर्तियों का ही महत्व होता है। एेसे में तीन महीने पहले ही इन मूर्तियों को बनाने का काम शुरू कर दिया जाता है। दिन रात मेहनत कर एक एक मूर्ती तैयार की जाती है। यही उनकी रोजी रोटी का जरिया है। एेसे में अब उन्हें अच्छे खरीदारों का इंतजार है जो उनकी मेहनत की सही कीमत चुका सकें।
Published on:
08 Oct 2018 10:32 pm
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