
buray samne ko kaise dur kare
सतना। हिन्दू धर्म में ज्योतिष शास्त्र का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिष में भगवान सूर्यदेव को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। इसी कारण सूर्य की पूजा से कुंडली के सभी ग्रह दोष दूर हो सकते हैं। वहीं जातक का आने वाला कल शुभदायी हो जाता है। भगवान सूर्य को मनाने का सबसे सरल और कारगर उपाय है कि रोजाना अलसुबह नित्यकिृया से निवृत्त होकर सबसे पहले स्नान करें। फिर भगवान सूर्य को अघ्र्य अर्पित करें। जो लोग ये छोटा सा कार्य हर रोज करते हैं, वे घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। सूर्य की कृपा से घर में खुशहाली आती है। अधूर कार्य जल्द पूर्ण होते है। एकादशी पर सूर्य पूजा करने की सामान्य विधि है। ये विधि 10 स्टेप्स में बताई गई है। इस विधि से आप रोज सूर्य को जल चढ़ा सकते हैं।
सूर्य को रविवार का माना गया है कारक ग्रह
मैहर के ज्योतिषाचार्य पं. मोहनलाल द्विवेदी के अनुसार 10 जून रविवार को ज्येष्ठ मास के अधिक मास की एकादशी है। इस रविवार को एकादशी होने से ये तिथि बहुत खास हो गई है। अधिक मास में और एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है। ज्योतिष में सूर्य को रविवार का कारक ग्रह माना गया है। एकादशी और रविवार के योग में विष्णुजी के साथ ही सूर्य के उपाय भी किए जाए तो बुरा समय दूर हो सकता है।
ये है उपाय
1. सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य पूजा के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे को हाथ में लें। किसी ऐसे स्थान पर जाएं जहां से भगवान सूर्य देव आसानी से दिख रहे हो।
2. लोटे में साफ जल भरें और थाली में लाल चंदन, लाल फूल, चावल, प्रसाद के लिए गुड़ और अन्य पूजन सामग्री रखें। एक दीपक रखें।
3.लोटे में जल के साथ एक चुटकी लाल चंदन पाउडर मिला लें। लोटे में लाल फूल भी डाल लें। थाली में दीपक जलाएं और लोटा रख लें। थाली नीचे जमीन पर रखें।
4. इसके बाद ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को प्रणाम करें।
5. लोटे से सूर्य देवता को जल चढ़ाएं। सूर्य मंत्र का जाप करते रहें। इस प्रकार से सूर्य को जल चढ़ाना सूर्य को अघ्र्य देना कहलाता है।
6. अर्घ समर्पित करते समय लोटे से गिरने वाली जल की धारा से सूर्य को देखें।
7. ऊँ सूर्याय नम: अघ्र्यं समर्पयामि कहते हुए पूरा जल सूर्यदेव को चढ़ाएं।
8. सूर्य को अघ्र्य देने के बाद सूर्य देव की आरती करें। गुड़ का प्रसाद चढ़ाएं।
9. सूर्य का ध्यान करते हुए सात प्रदक्षिणा करें और हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
10. पूजा के बाद गुड़ का प्रसाद घर के लोगों में वितरित करें।
एकादशी पर सूर्य पूजा करने की सामान्य विधि है। ऊपर जो ये 10 विधियां बताई गई है। इस विधि से आप रोज सूर्य को जल चढ़ा सकते हैं। सूर्य को रविवार का कारक ग्रह माना गया है। भोर में नित्यकिृया से निवृत्त होकर सबसे पहले स्नान करें फिर भगवान सूर्य को अघ्र्य चढ़ाएं।
पं मोहनलाल द्विवेदी, ज्योतिर्विद मैहर
Published on:
09 Jun 2018 03:08 pm
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