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Chhath Puja 2019: 4 दिन चलने वाले पर्व का 31 अक्टूबर से आगाज, जानिए छठ पूजा के क्या है नियम, विधि, मुहूर्त

शहर के बिरला रोड स्थित संतोषी माता तालाब में छठ का त्योहार बड़ी सिद्धत के साथ मनाया जाता है। हालांकि छठ पूजा पर्व बिहारियों का मुख्य त्योहार है।

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सतना

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Suresh Mishra

Oct 31, 2019

Chhath Puja 2019: chhath puja vidhi muhurat history of chhath puja

Chhath Puja 2019: chhath puja vidhi muhurat history of chhath puja

सतना। शहर के बिरला रोड स्थित संतोषी माता तालाब में छठ का त्योहार बड़ी सिद्धत के साथ मनाया जाता है। हालांकि छठ पूजा पर्व बिहारियों का मुख्य त्योहार है। ये बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और झारखंड के कुछ हिस्सों मनाया जाता है। इसके साथ ही बिहारी जिन राज्यों में निवास करते है वहां पर छठ पूजा विशेष रूप से की जाती है। मैहर के ज्योतिषाचार्य

पं. मोहनलाल द्विवेदी के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी है। इस दिन छठ पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है और सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। ज्योतिष में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना गया है। इसलिए अगर सूर्य की नियमित आराधना और नियमित रूप से अघ्र्य दिया जाए तो कई लाभ मिल सकते हैं।

चार दिन चलता है त्योहार
31 अक्टूबर से शुरू हो रहा छठ पूजा का महापर्व 4 दिन तक मनाया जाता है। यह बिहार राज्य के प्रमुख त्योहारों में से एक है। छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान में पहले दिन नहाय-खाए, दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य की पूजा और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देते हैं।

इस विधि से सूर्य को दें अर्घ्य
1- पंडितों की मानें तो सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए रोजाना सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं।
2- जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का ही उपयोग करें, क्योंकि तांबा सूर्य की धातु है।
3- जल में चावल, रोली, फूल पत्तियां (यदि गुलाब की हो तो सर्वश्रेष्ठ है) भी डाल लेना चाहिए।
4- इसके बाद जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र का जाप करें।
5- गायत्री के साथ ही सूर्यदेव के 12 नाम वाले मंत्र का जाप कर सकते हैं।

सूर्य को जल चढ़ाने से मिलते हैं ये स्वास्थ्य लाभ
1- सूर्य को अर्घ्य देते समय पानी की जो धारा जमीन पर गिर रही है, उस धारा से सूर्यदेव के दर्शन करना चाहिए। इससे आंखों की रोशनी तेज होती है।
2- अर्घ्य देने के बाद जमीन पर गिरे पानी को अपने मस्तक पर लगाना चाहिए। सूयज़् को जल चढ़ाने के सुबह जल्दी उठना चाहिए। जल्दी उठने से स्वास्थ्य ठीक रहता है।
3- दिनभर काम करने के लिए समय ज्यादा मिलता है। जल चढ़ाने के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है। ऐसे में सुबह-सुबह के वातावरण का लाभ सेहत को मिलता है।

ये 12 नाम का मंत्र
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर, दिवाकर नमस्तुभ्यं, प्रभाकर नमोस्तुते।
सप्ताश्वरथमारूढ़ं प्रचंडं कश्यपात्मजम्, श्वेतपद्यधरं देव तं सूयज़्प्रणाम्यहम्।।

छठ पूजा का पहला दिन
– छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ हो जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले स्नान आदि कर नये वस्त्र धारण करते हैं। और शाकाहारी भोजन करते हैं। व्रती के भोजन करने के बाद ही घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करते हैं।

छठ पूजा का दूसरा दिन
– कार्तिक शुक्ल पंचमी के दिन व्रत रखा जाता है। व्रती इस दिन शाम के समय एक बार भोजन ग्रहण करते हैं। इसे खरना कहा जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को चावल व गुड़ की खीर बनाकर खायी जाती है। चावल का पिठ्ठा व घी लगी हुई रोटी ग्रहण करने के साथ ही प्रसाद रूप में भी वितरीत की जाती है।

छठ पूजा का तीसरा दिन
– कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। साथ ही छठ पूजा का प्रसाद तैयार करते हैं। इस दिन व्रती शाम के समय किसी नदी, तालाब पर जाकर पानी में खड़े होकर डूबते हुये सूर्य को अर्घ्य देते हैं। और रात भर जागरण किया जाता है।

छठ पूजा का चौथा दिन
– कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह भी पानी में खड़े होकर उगते हुये सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती सात बार परिक्रमा भी करते हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है।

छठ महापर्व की तारीख:
31 अक्टूबर – नहाय-खाय
1 नवंबर – खरना
2 नवंबर – सायंकालीन अर्घ्य
3 नवंबर – प्रात कालीन अर्घ्य