
Chhath Puja in Satna
सतना। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ आस्था और संस्कार छठ महापर्व मनाया गया। डूबते सूरज को अर्घ्य देने के लिए रविवार को शाम 4 बजे से ही संतोषी माता तालाब स्थित छठ घाटों पर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। रविवार को व्रती महिलाओं ने पूजन के बाद संतोषी माता तालाब के पानी में उतरकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। तालाब के चारों तरफ पूर्वांचलवासियों ने पूजा के लिए लगभग डेढ़ हजार से अधिक छठ घाट बनाए थे, जहां पर छठ मैया की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की गई। चार दिन चलने वाले छठ पर्व के दौरान दो बार सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि जो रविवार को दिया गया जबकि जबकि दूसरा अर्घ्य सप्तमी तिथि यानि आज उदय होने वाले भगवान सूर्य को दिया जाएगा। आज महिलाएं तालाब के पानी में उतरकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगी। छठ पूजा के दौरान सतना विधायक सिद्वार्थ कुशवाहा के अलावा अन्य नेता भी मौजूद रहे।
श्रद्धालुओं की रही भारी भीड़
संतोषी माता तालाब में छठ पूजा को लेकर जिला प्रशासन ने पर्याप्त इंतजाम किए थे। तालाब के चारो ओर साफ सफाई करने के साथ घाटों को बराबर किया गया था। रविवार की शाम 4 बजे छठ गीत गाते हुए घर से निकली महिलाओं ने तालाब में खड़े होकर (अस्ताचलगामी) सूर्य को अर्घ्य दिया। सूरज ढलने से एक घंटा पहले ही व्रतियों के परिजन अपने-अपने घरों से पूजा सामग्री को सिर पर रखकर निकले। भोजपुरी समाज के अध्यक्ष शैलेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि छठ पूजन के समय लगभग घाट पर लगभग 5 हजार लोगों की भीड़ मौजूद रही। घाट पर व्रती महिलाओं को अर्घ्य देने के लिए नि:शुल्क दूध का वितरण किया गया।
आज होगा व्रत का पारण
छठ पूजा का अंतिम और आखिरी दिन ऊषा अर्घ्य के साथ होगा। आज उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ के व्रत का पारण किया जाएगा। व्रती महिलाएं सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उदित होते सूर्य को अर्घ्य देगी। इसके बाद सूर्य भगवान और छठ मैया से संतान की रक्षा और परिवार की सुख-शांति की कामना करेंगी। इस पूजा के बाद व्रती कच्चे दूध, जल और प्रसाद से व्रत का पारण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत खोलेगी।
नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ था छठ पर्व
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय के साथ छठ पर्व की शुरुआत हुई थी। वहीं, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना का विधान किया गया, खरना की शाम को गुड़ वाली खीर का विशेष प्रसाद बनाकर छठ माता और सूर्य देव की पूजा के साथ व्रत रखा गया था। इसके बाद षष्ठी तिथि के पूरे दिन निर्जल रहकर शाम के समय अस्त होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य दिया गया और सूर्य उदय के साथ छठ पर्व का समापन आज होगा।
सुरक्षा के थे कड़े इंतजाम
छठ पूजा को लेकर संतोषी माता तालाब के पानी में उतरने के दौरान किसी प्रकार की अनहोनी न हो इसके लिए पुलिस और प्रशासन ने पर्याप्त इंतजाम किए थे। तालाब में जहां 2 मोटर वोट घूम रही थी वहीं तालाब के गहरे एरिया में न जाने का सूचना बोर्ड और रस्सी खींची गई थी। बिजली व्यवस्था के साथ माइकिंग और कन्ट्रोल रुम बनाया गया था। सीएसपी महेन्द्र सिंह और नायब तहसीलदार अनुराधा सिंह के साथ भारी संख्या में पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी।
Published on:
31 Oct 2022 02:59 am
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