
LIVE Update: Chitrakoot election result 2017
सतना। सियासी प्रतिष्ठा का विषय बनी चित्रकूट सीट पर सत्ताधारी दल भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी को १४१३३ मतों से हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी को कुल ६६८१० मत मिले। जबकि भाजपा के शंकर दयाल को ५२४७७ मत मिले। कांग्रेस की परंपरागत सीट पर कब्जा जमाने के लिए सत्ताधारी दल ने पूरी ताकत झोंक दी थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित आधा दर्जन मंत्रियों ने मोर्चा संभाला था।
तुर्रा गांव में कांग्रेस को मिले दोगुने वोट
रविवार को की गई मतगणना में कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी ने भाजपा के शंकरदयाल त्रिपाठी को १४१३३ मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। सुबह ८ बजे से शुरू हुई मतगणना में डाक मत पत्रों की संख्या शून्य रही। उसके बाद ईवीएम के मतों की गणना शुरू हुई। पहले चक्र में भाजपा कांग्रेस से ५२८ मतों से आगे रही। उसके बाद पिछड़ती गई। मतगणना के अंतिम परिणाम आने पर कांग्रेस प्रत्याशी को १४१३३ मतों से विजयी घोषित किया गया। मतों की गणना के दौरान तुर्रा के मतदान केंद्र पर सभी की नजर रही। यहां चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने आदिवासी लालमन गोंड़ के यहां एक रात आलीशान सुविधाओं के बीच गुजारी थी। लेकिन, जाते ही सारी सुविधाएं वापस कर ली गईं। इसके विपरीत परिणाम आए। तुर्रा में कांग्रेस को ४१३ और भाजपा को २०३ वोट मिले।
सच हुए अनुमानित परिणाम
उपचुनाव का अनुमानित जनादेश सही साबित हुआ। जहां प्रत्याशी चयन से लेकर प्रचार तक भाजपा सियासी झंझावतों में उलझी रही, वहीं कांग्रेस असंतोष और भितरघात के खतरों से बची रही। भाजपा की अपेक्षा कम दावेदार होने से कांग्रेस को प्रत्याशी चयन में भी आसानी रही। चुनाव परिणामों के पीछे कुछ बातें अहम रहीं, जिसे भाजपा की गलतियों के तौर पर देखा जा रहा है। सत्ता, साधन, सुविधाओं, संघ की ताकत, कार्यकर्ताओं की फौज और स्वयं मुख्यमंत्री की अगुवाई के बावजूद उपचुनाव में पराजय पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है। शिवराज सिंह द्वारा चित्रकूट विस क्ष्ेात्र में की विकास की घोषणाओं पर मतदाताओं ने भरोसा नहीं किया। कारण कि, २००८ से २०१३ के कार्यकाल में की गई ‘राम वन गमन पथ’ के विकास जैसे वायदों पर सरकार ने अमल नहीं किया।
हार के नतीजे से पहले ही गायब हुए भाजपाई
उपचुनाव के दौरान मतदाताओं और सियासी कार्यकर्ताओं के बीच से आ रही जानकारियों में ऐसे ही परिणाम अपेक्षित थे। ज्यादातर विश्लेषकों ने माना था कि परिस्थितियां भाजपा के विपरीत हैं। कांग्रेस का अंडर करंट था। भाजपा में शुरुआती दौर से ही हालात कुछ ठीक नहीं थे। इधर, मतगणना के ५वें चक्र के बाद से ही माना जाने लगा था कि कांग्रेस बड़ी जीत की ओर है। उसे हर चक्र में बढ़त मिलती गई। जैसे-जैसे मतों का अंतर बढ़ता गया कांग्रेस का उत्साह भी बढ़ा। जबकि, कल तक जीत का दावा करने वाले भाजपा नेता मतगणना परिसर से गायब रहे। पार्टी कार्यालय में सन्नाटा पसर गया। कांग्रेसी खेमे में अर्से बाद जबरदस्त उत्साह देखा गया। कार्यकर्ता नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के आने का इंतजार करते रहे। चित्रकूट में नीलांशु चतुर्वेदी को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। जबकि, भाजपा नेता हार के कारणों पर सफाई देते नजर आए। हमेशा की तरह रटारटाया जवाब रहा कि हार के कारणों का मंथन करेंगे। जनता का फैसला शिरोधार्य है। कांग्रेस ने भी इसे सच्चाई और जनता की जीत बताकर आभार जताया।
भगवान राम ने ये मैंडेट दिया है कांग्रेस को। भ्रष्ट, गुंडा सरकार, असंवेदनशील, भ्रष्टाचारी सरकार, झूठ का पुलिंदा लेकर घूमने वाले मुख्यमंत्री के खिलाफ ये मैंडेट है।
अरुण यादव, प्रदेशाध्यक्ष
प्रदेश में कुछ सीटें कांग्रेस की परम्परागत हैं। हम इस चुनाव में हार की समीक्षा करेंगे और आगे की तैयारी करेंगे। इस हार का २०१८ के विधानसभा चुनाव पर कोई
फर्क नहीं पड़ेगा।
नंदकुमार सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष
चित्रकूट में मुख्यमंत्री का झूठ काम नहीं आया। नेता प्रतिपक्ष की चुनावी रणनीति, कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग लाई है। चुनाव प्रेम भैया की स्मृति में हुआ। श्रेय राहुल भैया को जाता है।
यादवेंद्र सिंह, विधायक नागौद
जनता का फैसला सिरोधार्य है। हार की समीक्षा करेंगे। बड़े कारण तो स्पष्ट हैं। बारीक कमियों को तलाशेंगे। हम जनता तक अपनी बात पहुंचाने में असफल
रहे हैं।
नरेद्र त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष
चित्रकूट उपचुनाव के नतीजे किसके पक्ष में जाएंगे, कांग्रेस अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहेगी या नतीजे भाजपा के पक्ष में जाएंगे? इसका फैसला रविवार को मतगणना के बाद होगा। उपचुनाव में मतदान के बाद दो दिन तक शहर से गांव तक गली-कूचों में लगाए गए चुनावी अनुमानों के जो रुझान सामने आए हैं वह कांग्रेस को राहत देने वाले हैं। चुनावी पंडितों ने पोलिंग दर पोलिंग जो समीक्षा की है उसके अनुसार इस चुनाव में भी हवा कांग्रेस के पक्ष में रही।
जनता के चुनावी गुणा-गणित में भी माहौल कांग्रेस के पक्ष में बनता दिखाई दे रहा है। लेकिन, जात-पात और विकास के ज्वलंत मुद्दों से दूर मतदाताओं ने जिस खामोशी के साथ रिकॉर्ड मतदान किया है उससे चुनावी पंडितों का गणित भी गड़बड़ा गया है। ऊंट किस करवट बैठेगा, दो दिन तक समीक्षा के बाद भी इस पर कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
जीत के दावे
दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी जीत के दावे भी कर रहे हैं। चुनावी चर्चा में दो दिन तक मतदाताओं का मूड परखने के बाद लगाए गए कयासों के जो परिणाम आए हैं उसमें जनता कांग्रेस के पक्ष में खड़ी नजर आई। लेकिन, तीन दिन तक चित्रकूट में मुख्यमंत्री के डेरा डालने और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए मतदान के ठीक पहले तक भाजपा के नेता और कार्यकर्ता जिस रणनीति के साथ गांवों में जमे रहे, उसे देखकर चुनाव परिणाम यदि भाजपा के पक्ष में जाते हैं तो जनता को आश्चर्य नहीं होगा।
जीएसटी और टॉयलेट का असर
उपचुनाव में चर्चा का केद्र बिंदु रहा तुर्रा गांव का टॉयलेट भी चुनाव की दिशा तय करने वाला है। गांव के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक रात इस गांव में गुजारी थी। इससे उम्मीद यह लगाई जा रही थी कि तुर्रा सहित आसपास के मतदाताओं का मूड बदलेगा। लेकिन, मुख्यमंत्री के आगमन से ठीक पहले गांव के सरपंच के घर पर टॉयलेट बनाने और उसे उखाडऩे का मामले से मामला गड़बड़ा गया। जीएसटी के बाद जिले में यह पहला चुनाव था। जीएसटी से नाराज भाजपा का परम्परागत वोट बैंक माने जाने वाले व्यापारी क्या इस चुनाव में भाजपा का साथ दिया, इसके नतीजे तो मतगणना के बाद ही तय होंगे।
राजनीति को नई दिशा देगा उपचुनाव
उपचुनाव के परिणाम सत्तारूढ़ भाजपा अथवा विपक्षी दल कांग्रेस किसी के भी पक्ष में आएं, लेकिन यह चुनाव विंध्य की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। यहां होने वाली हार-जीत भाजपा के मिशन-20१८ को भी खासा प्रभावित करेगी। उलगातार मिली हार से परेशान कांग्रेस की यदि जीत होती है तो यह उसके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी। हारने वाले के लिए यदि यह संभलने का मौका होगा तो जीतने वाले पर जश्न के साथ और संभलकर कम समय में अपेक्षाओं को पूरा करने का दबाव रहेगा।
Updated on:
12 Nov 2017 06:12 pm
Published on:
12 Nov 2017 07:58 am
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