5 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आधी रात जन्में यीशू, खुशी के गीतों से गूंजे गिरजाघर

अनुयाइयों ने केक काटकर की विशेष प्रार्थना, विश्व शांति, भाईचारे व सौहार्द के लिए की गई कामना

2 min read
Google source verification
Christmas celebration in satna

Christmas celebration in satna

सतना. क्रिसमस पर्व की पूर्व संध्या पर मंगलवार को इसाई समुदाय में खासा उत्साह देखने को मिला। देर रात गिरजाघरों में केक काटकर प्रभ यीशु का जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान विशेष प्रार्थना व कैरोल गाकर शांति का संदेश दिया। साथ ही केक काटकर आपास में खुशियां बांटी। बस स्टंैंड के पास स्थित क्राइस्ट ज्योति स्कूल परिसर में स्थित कैथोलिक चर्च में क्रिसमस सेलिब्रेशन के लिए हर वर्ग व समुदाय के लोग पहुंचे थे। विशेष प्रार्थना सभा में शामिल होकर प्रभु यीशु के संदेश आत्मसात करने का संकल्प लिया। फादर ने बताया कि प्रभु यीशु ने दुनियां को मानवता व शांति का संदेश देने के लिए अपने आपको न्योछावर कर दिया था। इसी प्रकार रेलवे कॉलोनी व पतेरी स्थित चर्च में भी धूम-धाम से क्रिसमस पर्व मनाया गया। विशेष प्रार्थना सभा के बाद समुदाय से सभी लोगों ने हाथ में कैंडिल लेकर व खुशी के गीत गाते हुए चर्च की परिक्रमा लगाई।


क्रिसमस सेलिब्रेशन को लेकर शहर के सभी चर्र्चाें में बीते सप्ताहभर से तैयारी की जा रहीं थीं। रंग-बिरंगी लाइटिंग के बीच थर्माकोल की सीट व घासफूस से बर्फीली पहाड़ी, गौशाला, चरवाहों का निवास व राजाओं के महलनुम आकर्षक आकृतियां तैयार की गर्ईं थीं। ताकि, यीशू के जीवन संघर्षों को अहसास किया जा सके।
ईश्वर की साक्षात प्रेममय उपस्थित
संत विसेंट चर्च काथलिक चर्च के फादर जॉन थोप्पिल ने समृद्धि, सौहार्द व विश्व शांति की कामना करते हुए बताया कि प्रेम से दृवित होकर हमारा मुक्ति मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से प्रभु परमेश्वर ने अपनी एकलीन पुत्र को इस संसार में भेजा था। खीस्त जयंती ईश प्रभु की अनोखी कहानी है, जो बताती है कि ईश्वर ने संसार को प्यार किया है। इसलिए उसने अपने इकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया। पाप को छोड़कर हर तरह से उनका जीवन मनुष्य सा था। स्पष्ट है कि भगवान हमारे साथ व बीच है। खीस्त जयंती साक्षात ईश्वर की प्रेममय उपस्थित है। जो ईश्वर की आत्मीयता, पे्रमानुसार व घनिष्ठता दर्शाती है। ईश्वर मानव रूप धारण कर हमारे बीच आए ताकि, हम उनके ईश्वरत्व में सहभागी बन सकें। वह हमारी मानवता, निर्धनता, संघर्ष, समस्याओं में भी इसीलिए भाग लेते हैं। उन्होंने पापियों, वेश्याओं, दुखियोंं पददलितों, कमजोरों व हाशिये पर जीवन बसर करने वाले लोगों का पक्ष लिया। उनकी सेवा व प्रेम के मिशन में लगे रहे। पीडि़तों को मदद, मृतकों को जीवन, पापियों का हृदय परिर्वतन व ढोंगियों को ललकारा। उनके जीवन की ये सभी घटनाएं काल्पनिक नहीं, बल्कि सांकेतिक भाषा में दिए गए प्रवचन हैं।

अपनाना होगा त्याग, तपस्या व प्रार्थनामय जीवन
फादर ने बताया कि क्रिसमस का पर्व सभी मानव जातियों को खुशी का मौका देता है। क्योंकि, प्रभू खीस्त सभी मानव जाति के लिए आए थे। इस त्योहर को भली भांति मनाने के लिए हमे त्याग, तपस्या व प्रार्थनामय जीवन अपनाना होगा। भ्रातत्व व एकता में बंधे रहने का मार्ग प्रशस्त करना होगा। प्रभु ईशा की जयंती पर सभी प्राणी प्रेम, शांति व दया का अनुभव करें। जो भिन्न कृपा वरदानों के रूप में मिलती है। आपसी ईष्र्या द्वेश छोड़कर प्रेम व शांतिमय जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।